साहिर लुधियानवी रूमान और इंकलाब के शायर थे

साहिर लुधियानवी रूमान और इंकलाब के शायर थे। प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यक्रम ‘साहिर लुधियानवी एक सदी की दास्तान’ में बोले हिंदी-उर्दू के साहित्यकार।

प्रगतिशील लेखक संघ ने बुधवार को ‘साहिर लुधियानवी एक सदी की दास्तान’ कार्यक्रम आयोजित किया। कॉमर्स कालेज में उर्दू के प्रोफेसर सफदर इमाम कादरी ने कहा ‘ साहिर काल तरक्की पसंद लोगों का स्वर्ण युग है। कवि आलोक धन्वा ने कहा वे भारतीय कौम को आवाज देने वाले शायर हैं। कार्यक्रम में साहिर के कई गीत भी गाए गए।

प्रगतिशील लेखक संघ, पटना द्वारा माध्यमिक शिक्षक संघ भवन में साहिर लुधियानवी जन्मशताब्दी पर केंद्रित कार्यक्रम “साहिर लुधियानवी एक सदी की दास्तान” का आयोजन किया गया। प्रो तरुण कुमार की अध्यक्षता में पहले सत्र का प्रारंभ साहिर लिखित गीतों के गायन से हुआ। आगत अतिथियों का स्वागत गजेंद्रकांत ने किया। प्रगतिशील लेखक संघ की पटना इकाई के इस आयोजन में बड़ी संख्या में हिंदी – रुर्दू के अजीब, शायर, साहित्यकार, रंगकर्मी, साहित्यकार शामिल थे।

गायक रवि किशन ने साहिर के कुछ गीतों से कार्यक्रम का प्रारंभ किया। मो आसिफ अली ने अपने परिचयात्मक अभिभाषण में उनके जीवन के तमाम पहलुओं पर प्रकाश डाला।

प्रगतिशील लेखक संघ के उपमहासचिव अनीश अंकुर ने विषय प्रवेश के दौरान साहिर लुधियानवी की प्रगतिशील चेतना को रेखांकित करते हुए कहा ” उन्होंने पहली बार गीतों को मार्क्सवादी विचारधारा से जोड़ने का काम किया। उन्होंने पहली बार गरीबों और वंचितों की आवाज को अपने अपने गीतों जगह दी। कम्युनिस्ट पार्टी से उनके ताल्लुकात थे। “

ए.एन कॉलेज में उर्दू के प्राध्यापक मणिभूषण जी ने अपने व्याख्यान में कहा ” वे मजलूमों की आवाज बनते हैं। वे अपने जमाने की शायरी का जायजा लेने का काम करते हैं। इकबाल उनके प्रिय शायर थे पर जब इकबाल मुसोलिनी पर शेर लिखते हैं तो वे उन्हें भी नहीं छोड़ते। उनकी आलोचना करते हैं।

प्रसिद्ध कवि आलोक धन्वा ने साहिर के जीवन के कई छुए-अनछुए पहलुओं को उदघाटित करते हुए कहा ” इतिहास को जाने बिना हम गूंगे-बहरे होते हैं। इतिहास हमें भाषा देता है,जबान देता है। इतिहास को जानना साहिर को जानना है। वे भारतीय कौम को आवाज देने वाले शायर हैं। “

मरजान अली ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा ” वे सच्चे अर्थों में सेक्यूलर थे। उनके गीतों में उस समय के सामाजिक यथार्थ के लगभग सभी रंग मौजूद हैं। उनके नज़्म इन्कलाबी हैं। “

पटना कॉलेज के प्रचार्य प्रोफेसर तरुण कुमार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा ” देर से ही सही हमनें साहिर को याद तो किया । कविता और राजनीति का रिश्ता गहरा होता है यह पहली बार साहिर की शायरी में दिखता है। पहले सत्र का संचालन गजेन्द्र कान्त शर्मा द्वारा किया गया। “

साहिर लुधियानवी : एक सदी की दास्तां के दूसरे सत्र का विषय था ” साथी हाथ बढ़ाना “। इस सत्र के शुरुआत रविकिशन द्वारा ‘ जिन्हें नाज़ है हिंद पर कहां हैं ‘ द्वारा इस सत्र का संचालन प्रलेस के जयप्रकाश ने किया।

तरन्नुम जहां ने अपने संबोधन में कहा ” साहिर ने अमन और तहज़ीब की बातें की और पूरी दुनिया में अमन के पैगंबर की तरह नजर आए। उन्होंने तकसीमे हिंद के खिलाफ काफी कुछ लिखा।

अलीना अली मल्लिक ने कहा कि साहिर ने एस. डी बर्मन और ओ पी नय्यर से मिलकर फिल्मी जगत में धूम मचा दी। आफसा बानो ने साहिर लुधियानवी ने औरतों के किरदार के बारे में बात करते हुए कहा ” साहिर की शायरी में औरत वक्त के आगे बेबस तो नजर आती है लेकिन हिम्मत से काम लेती नजर आती है। साहिर ने औरतों को उनके नाजो अदा से बाहर करके उसे इंसानी वजूद प्रदान किया। शगुफ्ता नाज ने साहिर के ‘समाजी और सियासी शऊर’, फरहत सगीर ने ‘साहिर की शायरी में रूमानियत’ नाहिद परवीन ने ‘साहिर ने शायरी में औरतों का तसव्वुर’ और कृष्ण समिध ने भी अपनी बातें रखी। अध्यक्षीय वक्तव्य शायर संजय कुमार कुंदन ने दिया।

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By Editor


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