तेजस्वी बोले CM माफी मांगें, लोग कह रहे यह स्पीकर का ‘सरेंडर’ है

तेजस्वी बोले CM माफी मांगें, लोग कह रहे यह स्पीकर का ‘सरेंडर’ है

CM के स्पीकर पर भड़कने का मामला गर्मा गया। तेजस्वी ने सीएम से माफी की मांग की। पब्लिक में स्पीकर का ‘सरेंडर’ भी चर्चा में। सत्ता पक्ष की होली का रंग बिगड़ा।

कुमार अनिल

बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस प्रकार स्पीकर को उंगली दिखा-दिखा कर चुप कर दिया, उसकी गूंज गांव-गलियों तक पहुंच गई है। कुछ लोग चटखारे लेकर बता रहे हैं कि क्यों स्पीकर ने किया ‘सरेंडर’। कुछ नीतीश कुमार के गरमाने की वजह बता रहे। इस बीच आज विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी मांगने की मांग करके सत्ता पक्ष की होली बिगाड़ दी है। इस बार सत्ता पक्ष की होली विधानसभा के हड़काउ बनाम सरेंडर कांड की छाया में होगी।

गांव-गांव में क्या चर्चा है, उससे पहले राजधानी की बात कर लें। आज विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी मांगने की मांग करके सत्ता पक्ष के घर में आग लगा दी है। अगर भाजपा स्पीकर के अपमान पर चुप रह जाती है, तो इससे उसकी छवि और भी कमजोर होगी और अगर नीतीश कुमार पीछे नहीं हटते हैं, तो विपक्ष उन पर संसदीय मर्यादा को तार-तार करने का आरोप चस्पां कर देगा। वैसे भी नीतीश कुमार के भड़कने का वीडियो देसभर ने देखा और हर किसी ने मुख्यमंत्री के व्यवहार को अमर्यादित ही नहीं, निरंकुश भी कहा।

राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने प्रदेश की जनता के नाम वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने नीतीश कुमार पर जोरदार हमला किया। कहा कि विधानसभा के भीतर अध्यक्ष सर्वोपरि होता है। वही नियमन देता है। पहली बार विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री स्पीकर को निर्देश देते देखे गए। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। यह तानाशाही प्रवृत्ति दिखाता है।

उधर, बिहार के गांवों तक में मुख्यमंत्री का भड़कना चर्चा में है। लोग स्पीकर के व्यवहार को भी लोकतंत्र को कमजोर करनेवाला बता रहे हैं। लोग पीए संगमा को याद कर रहे हैं और बिहार विधानसभा के स्पीकर की तुलना करके माथा पीट रहे हैं। कई लोग इसे सरेंडर की संज्ञा दे रहे हैं। लोग इसकी वजह भी बता रहे हैं। एक व्यक्ति ने नौकरशाही डॉट कॉम को अपना विश्लेषण बताते हुए मुख्यमंत्री को डेढ़ सौ ग्राम की संज्ञा दी। कहा कि वे जिधर जाएंगे, वह पूरा हो जाएगा। राजद दरवाजा खोल कर इंतजार कर रहा है। भाजपा की मजबूरी है। इसीलिए रीढ़ खत्म करके सत्ता में हैं।

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