उन्होंने क्यों कहा- ‘पूरब में सबसे बुरा हाल बाभनों के लौंडों का है’

उन्होंने क्यों कहा- ‘पूरब में सबसे बुरा हाल बाभनों के लौंडों का है’

उसने गांधी को क्यों मारा, सावरकर जैसी अनेक पुस्तकों के लेखक अशोक कुमार पांडेय ने आखिर क्यों कहा- ‘पूरब में सबसे बुरा हाल बाभनों के लौंडों का है।’

स्वतंत्रता आंदोलन में हर जाति के लोग कुरबानी दे रहे थे। ब्राह्मण भी बलिदान देकर देश की तकदीर लिख रहे थे। आज यूपी चुनाव में इस बिरादरी के लड़के क्या कर रहे हैं? सवाल यह भी है कि यूपी चुनाव में हर जाति की चर्चा है, पर ब्राह्मण मुख्यतः चर्चा से बाहर हैं। उनके नाराज होने की खबरें आती हैं, पर वह सड़कों पर दिखी नहीं। यह बिरादरी मुखर होने के बजाय इतनी असमंजस में क्यों है? न वह ठीक से कह पा रही कि 150 रुपए पेट्रोल, 1500 रुपए गैस मंजूर है, नौकरी नहीं चाहिए, बस राम मंदिर काफी है। न यह जोर से कह पा रही कि वह बदलाव चाहती है।

कश्मीर और कश्मीरी पंडित, उसने गांधी को क्यों मारा, सावरकर जैसी कई पुस्तकें लिख चुके अशोक कुमार पांडेय खुद भी मूल रूप से पूर्वी यूपी के हैं। उन्होंने पूर्वी यूपी के खास देशज शब्दों में ब्राह्मण युवाओं पर जबरदस्त टिप्पणी की। कहा-पूरब में सबसे बुरा हाल बाभनो के लौंडों का है। लिटरली कोई पूछ नहीं रहा। रोज़ जय श्रीराम का नारा लगा रहे हैं, फ़ॉर्म भर रहे हैं, दिन भर यहाँ-वहाँ पान की दुकान पर भटक रहे हैं और रात में पौवा में शेयर करके सो जा रहे हैं। कभी इस इलाक़े में ज्ञान की धारा बहा करती थी।

अशोक कुमार पांडेय के ट्वीट के जवाब में रोचक टिप्पणियां आई हैं। आप उनके ट्विटर हैंडल पर जाकर देख सकते हैं। हां वे भक्त भी मिलेंगे, जो हमेशा पूछो आम, तो जवाब ईमली देते हैं यानी बात रोजगार या भविष्य की हो, पर वे सिर्फ मुस्लिम, पाकिस्तान ही बतिआएंगे।

अशोक कुमार पांडेय के ट्वीट के जवाब में जेपी सिंह ने लिखा है-सर ठाकुरों के लड़कों का भी यही हाल है। कुर्मी पटेल नाम के एक यूजर ने लिखा-दशा ऐसे हो चुकी है कि मुस्लिम धर्म से नफरत को ही ये अपनी नौकरी समझने लगे है। रंग विशेष का अगउँछा लपेट के लफंगई करेंगे। मोटरसाइकिल भांय-भांय करेंगे। बस इसी में सारा दिन निकाल रहे। धर्म की अफीम के चलते शरीर तेजहीन, कमजोर, आंखों में नफरत की तस्वीर लिए ये हर गली हर नुक्कड़ में मिलेंगे।

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