बिहार में ओवैसी की आक्रामक राजनीति से कांग्रेस भयभीत

बिहार में ओवैसी की आक्रामक राजनीति से कांग्रेस भयभीत

All India Majlis-e-Ittehadul-Muslimeen (AIMIM) बिहार के सीमांचल में अपनी जड़ें जमा चुकी है जिससे कांग्रेस डरी हुई नज़र आ रही है.

ओवैसी की पार्टी बिहार में कुल 243 सीटों में से जिन 50 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है, उनमे ज़्यादातर सीमांचल में है. कांग्रेस पार्टी के फिलहाल 27 में से आधे के करीब विधायक सीमांचल से है. सीमांचल में चार ज़िले है; पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज जहा AIMIM पार्टी नए सामाजिक समीकरण गढ़ चुकी है. जय भीम जय मीम के नारे के साथ पार्टी ने सियासी पार्टियों के राजनीतिक चूक को एक वोट बैंक के रूप में तब्दील कर दिया है.

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सीमांचल में 25 विधान सभा सीटें है. 2015 में कांग्रेस ने सीमांचल में 8 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमे से 6 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.

AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के आक्रामक राजनीती से कांग्रेस की चिंताएं बढ़ी है, लेकिन कांग्रेस बिहार में कोई ओवैसी फैक्टर होने से इंकार कर रही है. बिहार प्रदेश कांग्रेस समिति (BPCC) प्रवक्ता (Spokesperson) राजेश राठौर ने कहा कि “बिहार में ओवैसी कुछ नहीं कर पाएंगे। जनता जानती है की ओवैसी बीजेपी की टीम बी है”.
जब हमने उनसे पूछा की क्या ओवैसी की वजह्कर कांग्रेस का वोटबैंक खिसक सकता है, तो उन्होंने जवाब दिया कि “लोग हमसे क्यों नाराज़ होंगे, हम तो सत्ता में नहीं है बल्कि विपक्ष है. बिहार में कोई ओवैसी फैक्टर नहीं है”

AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और अन्य ने भी अल्पसंख्यकों को धोखा दिया है और उनका इस्तेमाल केवल चुनावी लाभ के लिए किया है ”

उन्होंने कहा “इस बार हम बिहार से नीतीश कुमार की सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। हमलोग न सिर्फ मुसलमानो को बल्कि दलितों को भी आवाज़ दे रहे. बिहार में लोग बदलाव चाहते है. हमलोग ज़रूर अच्छा प्रदर्शन करेंगे”.

असदुद्दीन ओवैसी ने भी ट्वीट कर बिहार की जनता से मजलिस को मज़बूत करने की अपील की है.

असदुद्दीन ओवैसी की फैन फॉलोविंग उनके वक्तव्यों के ज़रिये बढ़ प्रदेश में भी बढ़ रही है. उनसे बिहार की एक बड़ी मुस्लिम आबादी भी प्रभावित है. यहाँ उनकी पार्टी को बिहार की प्रमुख सियासी पार्टियों के उस राजनीतिक चूक का फायदा मिलेगा, जिसे दो ध्रुवों की लड़ाई के बीच तीसरे को मिल जाना कहते है. इसमें लालू और नीतीश से नाराज़ वोटर है जो स्विच कर सकते है. वही जय भीम जय मीम के नारे के साथ अपना वोट बेस बढ़ने में लगी है. रही है. हालांकि AIMIM का बिहार में सिर्फ एक MLA किशनगंज से है.

हाल ही में बैसि (Baisi) पूर्व विधायक रुकनुद्दीन अहमद AIMIM का दामन थाम चुके है.

बता दें की पार्टी ने बिहार में 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. मुसलमानो के बीच पार्टी की लोकप्रियता बढ़ी है, वही AIMIM दलित उम्मीदवार को चुनाव में उतारेगी तो राजद और कांग्रेस का वोट बैंक खिसकना लाज़मी है. इसलिए कांग्रेस और राजद दोनों अपने वोट बैंक को लेकर रणनीति बनाने में लगे है.

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राज्य के सियासी हलके के नेतागण भी इस हकीकत से वाकिफ है की ओवैसी मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को लेकर आक्रामक राजनीती करते है. वह एक बिहार में एक नया सियासी समीकरण गढ़ चुके है और ज़मीनी राजनीती में कारगर सिद्ध करने में लगे हुए है. उनके इस रणनीति की वजह से राजद और कांग्रेस की चिंता बढ़ गयी है.

ओवैसी की ने कुल 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. ज़्यादातर सीटें सीमांचल इलाके में जहा कांग्रेस और राजद का कब्ज़ा रहा है. सीमांचल में 4 जिले- पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार हैं. मजबूत वोट बैंक के हिसाब से यह मुस्लिम बहुल इलाका है. यहाँ पर कांग्रेस जीतती रही है. वही किशनगंज में AIMIM ने उपचुनाव में जीतकर कांग्रेस का सीट ले लिया।

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