पद्म सम्मान पाने पर चर्चे में हैं मसालों के शहंशाह:तांगा वाला से ले कर MDH के CEO बनने की कहानी

95 साल की उम्र का जवान हैं धर्म पाल गुलाटी.MDH मसला सच सच सुनते ही आपको सफेद मूछों वाले एक बुजुर्ग की याद ताजा करा देती है. आज वह चर्चा में हैं क्योंकि उन्हें पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया है. नाम है धर्म पाल गुलाटी. जो एफएमसीजी मार्केट के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले बुजुर्ग हैं.

धर्मपाल गुलाटी MDH ग्रूप का मालिक हैं. अपने करियर की शुरुआत तो उन्होंने तांगा चलाने से की लेकिन जल्द ही ‘महाशय दी हट्टी’ नाम से मसाले की दुकान शुरू कर दी. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस ग्रूप के सीईओ की हैसियत से उन्होंने 2018 में 25 करोड़ रुपये की सैलरी प्राप्त की. यह एफएमसीजी सैक्टर में सर्वाधिक है.

 

बताया जाता है कि धर्म पाल गुलाटी को महाशय जी के नाम से उनके करीबी पुकारते हैं पाकिस्तान के सियालकोट में पैदा हुए और विभाजन के बाद दिल्ली आ गये. तब उनके पास मात्र 1500 रुपये थे. उन्होंने तांगा खरीदा और चलाने लगे. लेकिन जल्द ही उन्होंने मसालों की दुकान शुरू कर दी. फिर जीवन में कभी पीछे मुडके नहीं देखा.

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गुलाटी पांचवी तक की पढ़ाई करने वाले शायद दुनिया के वर्तमान में एक मात्र CEO हैं.

MDH की धूम

आज उनकी कम्पनी 200 करोड़ रुपये की हो चुकी है.  MDH मसालों के कुल 62 प्रोडक्ट बाजार में उपलब्ध हैं. उनकी 18 फैक्ट्रियां भारत के अलावा दुबई में  हैं.

MDH Dharmapal Gulati

पत्नी के साथ जवान महाशय जी

1923 में जन्मे महाशय जी के छह बेटियां और एक बेटा है. सभी उनके कारोबार में हाथ बंटाते हैं. वह कहते हैं कि अभी तक जवान हैं. 95 वर्ष का जवान. वह हर सुबह पार्क में टहलने जाते हैं और घर लौट कर योगा करते हैं. एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार गुलाटी प्रति दिन अपनी किसी ना किसी फैक्ट्री में जाते हैं.

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गुलाटी देश और दुनिया की घटनाओं से नियमित रूप से अपडट होते रहते हैं. वह व्हाट्स ऐप का नियमित इस्तेमाल करते हैं. गुलाटी का कहना है कि सादा जीवन और नियमित एक्सरसराइज ही उनके स्वस्थ जीवन का राज है.

टाइम्स आफ इंडिया का कहना है कि उत्तर भारत में आज MDH का 80 प्रतिशत मार्केट पर कब्जा है. गालाटी का मूल मंत्र है- ईमानदारी और अपने बड़ों का सम्मान.

 

 

 

 

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