60 के हुए तो कैल्सियम व विटामिन डी लेना जरूरी : डॉ. अमित

60 के हुए तो कैल्सियम व विटामिन डी लेना जरूरी : डॉ. अमित

पारस अस्पताल के हड्डी एवं जोड़ प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. अमित कुमार बता रहे हैं 50 से अधिक की महिलाएं और 60 से अधिक के पुरुष को क्या-क्या हो सकती है परेशानी।

पारस अस्पताल कें हड्डी एवं जोड़ प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. अमित कुमार ने बताया है कि महिलाएं 50 वर्ष से अधिक और पुरुष 60 वर्ष से अधिक उम्र होने पर कैल्सियम और विटामिन डी का अतिरिक्त पूरक आहार लेना शुरू कर दें। क्योंकि उम्र के साथ हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और जोड़ भी घीसने लगता है। ऐसे में पूरक आहार परेशानियों को कम करेगा। पूरक आहार में इनकी गोलियां भी हो सकती हैं। उम्र ढलने पर कैल्सियम, विटामिन डी और बोन मिनरल डेनसिटी की हर वर्ष जांच कराएं। फिर उसके अनुसार जीवनचर्या रखें। आहार में पनीर, दूध, मांस, मछली आदि शामिल करने से हड्डियां मजबूत होती हैं।

जोड़ प्रत्यारोपण लगभग सफल
पारस अस्पताल के डॉ. अमित कुमार के अनुसार अगर दर्द इतना होता है कि थोड़ी दूर चलना पड़े तो डर लगता हो, रोज दर्द निवारक गोलियां खानी पड़े, पैर ज्यादा टेड़ा होने लगे आदि। पैर टेड़ा होने से हड्डी का क्षरण होता है। ऐसे में सर्जरी करा लेनी चाहिए। घुटना या कूल्हा प्रत्यारोपण लगभग सफल है। इसलिए यदि समस्या है और डॉक्टर घुटना या कूल्हा का रिप्लेसमेंट करने के लिए कह रहे हैं तो कराना चाहिए। ऑपरेशन के अगले दिन से ही मरीज पूरा वजन डाल कर चलने लगता है। एक घुटना के प्रत्यारोपण में डेढ़ लाख रुपए और दोनों घुटने के प्रत्यारोपण में 2.75 लाख रुपए खर्च आता है। वहीं कूल्हा प्रत्यारोपण में भी डेढ़ लाख रुपए का खर्च आता है। एक घुटना के ऑपरेशन में एक घंटा लगता है। यदि दोनों एक साथ हो ऑपरेशन हो तो ढ़ाई घंटा लगता है। वहीं कूल्हा के प्रत्यारोपण में एक घंटा लगता है। ऑपरेशन के लिए मरीज को बेहोश नहीं किया जाता है बल्कि कमर में इंजेक्शन लगाकर नीचले हिस्से को सून किया जाता है। फिर ऑपरेशन होता है।

उम्र बढ़ने पर ये न करेंः पालथी मारकर बैठना, चुक्कुमुक्कु बैठना।
ये करेंः नियमित व्यायाम करें, पौष्टिक आहार लें और कैल्सियम और विटामिन डी का अतिरिक्त आहार लें।
सर्जरी के अलावा यह भी उपायः जोड़ का जांच कर देखा जाता है कि दर्द किस ओर है। अमूमन अंदर में ज्यादा दर्द होता है। जांच में गैप भी देखा जाता है। साइनोवियल फ्ल्यूड हड्डी को घीसने से बचाता है। उम्र बढ़ने पर यह कम हो जाता है। ऐसे में व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। साथ में साइनोवियल फ्लूइड् बढ़ाने की दवा दी जाती है। मांसपेशी को मजबूत करने की दवा दी जाती है ताकि हड्डी पर कम भार पड़े।

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