आलोचना के प्रचलित शब्दों से डरी सरकार, घोषित किया असंसदीय

आलोचना के प्रचलित शब्दों से डरी सरकार, घोषित किया असंसदीय

संसद में विपक्ष अहंकार, जुमलाजीवी, पाखंड, नौटंकी तानाशाही, विश्वासघात जैसे शब्दों का उपयोग नहीं कर सकता। आलोचना के प्रचलित शब्दों से डरी सरकार।

हिंदी-प्रेमी सरकार ने हिंदी के अनेक प्रचलित शब्दों को असंसदीय घोषित कर दिया है। अब विपक्ष संसद में सरकार की आलोचना करते हुए अहंकार, जुमलाजीवी, पाखंड, नौटंकी तानाशाही, विश्वासघात, विनाश पुरुष, स्नूप गेट, लॉलीपॉप निकम्मा जैसे प्रचलित शब्दों का उपयोग नहीं कर सकता। इस निर्णय की भाजपा को छोड़कर सारे दल, देश के प्रबुद्ध लोग, संगठन सभी आलोचना कर रहे हैं। लोकसभा सचिवालय जिन शब्दों को असंसदीय घोषित किया, उनमें शकुनी, जयचंद, ढिंढोरा पीटना, अराजक, दोहरा चरित्र, अहंकार, भ्रष्ट, ख़रीद-फ़रोख़्त, गिरगिट, गुंडा, ग़द्दार, काला दिन, कालाबाज़ारी, बहरी सरकार भी शामिल है। हां, आंदोलनजीवी शब्द को सूची से बाहर रखा गया है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष की आलोचना करते हुए इस शब्द का इस्तेमाल किया था। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री किसानों को आंदोलनजीवी कह सकते हैं, लेकिन किसान सरकार को जुमलाजीवी नहीं कह सकता। यह है सरकार की असलियत।

पत्रकार अजीत अंजुम ने कहा कि विपक्ष के लिए आलोचना के शब्दों का अकाल पड़ने वाला है। वहीं गुजराती लेखक और व्यंग्यकार उर्वीश कोठारी ने कहा कि सरकार बहुत दयालु है। उसने मो. जुबैर, तीस्ता सीतलवाड़ और सुधा भारद्वाज के नाम को प्रतिबंधित नहीं किया है। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि जुमलाजीवी नहीं कह सकते, लेकिन जुमलेश्वर तो कह सकते हैं। उर्वीष कोठारी ने बेहद रोचक वीडियो जारी किया है।

पूर्व सांसद पप्पू यादव ने अच्छा सवाल खड़ा किया। कहा-शकुनि शब्द असंसदीय हो गया, तो क्या माननीय पूर्व सांसद शकुनि चौधरी जी का नाम संसदीय रिकार्ड से हटा दिया जाएगा! हद है मूर्खता की! राजद ने कहा-बाहर दंगे करवाएँगे, पत्रकारों-समाजसेवियों को जेलों में सड़ाएंगे, युवाओं के भविष्य को मिट्टी में मिलाएँगे, और संसद में घुसते ही ‘संत’ हो जाएँगे, सधी आलोचना से भी आहत हो जाएँगे! जब आलोचना करने देना ही नहीं है तो क्यों नहीं संसद में ‘परमपूज्य पाद’ की मूर्ति बिठाकर पूजा करवाई जाए!

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