अगस्त तक कोरोना से हो सकती है 10 लाख लोगों की मौत : एक्सपर्ट

अगस्त तक कोरोना से हो सकती है 10 लाख लोगों की मौत : एक्सपर्ट

अमेरिकी रिसर्च संस्था IHME ने कहा, भारत में 1 अगस्त तक कोरोना से 10 लाख लोगों की मौत हो सकती है। प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल द लांसेट ने भारत पर संपादकीय लिखा है।

कुमार अनिल

अमेरिकी रिसर्च संस्था IHME (द इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेटरिक्स एंड इवैलुएशन) के अनुसार भारत में 1 अगस्त तक दस लाख लोगों की कोरोना से मौत हो सकती है। संस्था ने कहा कि विभिन्न देश जितने लोगों की मौत की पुष्टि कर रहे हैं, वास्तव में उससे दोगुना लोग मर रहे हैं।

दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित जर्नल द लांसेट ने इस बार अपना संपादकीय भारत में कोविड इमरजेंसी शीर्षक से प्रकाशित किया है। जर्नल ने संपादकीय में अमेरिकी संस्था की रिपोर्ट के हवाले कहा कि अगर ऐसा हुआ, तो इसके लिए पूरी तरह मोदी सरकार जिम्मेवार होगी। जर्नल के नए अंक को कोई भी व्यक्ति गूगल करके पढ़ सकता है।

द लांसेट ने संपादकीय में कहा कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने मार्च में घोषणा कर दी कि भारत में कोविड लगभग समाप्त (endgame) हो गया है। जर्नल ने कहा कि भारत में हाल यह है कि अप्रैल तक भारत सरकार का टास्क फोर्स महीने में एक बार भी बैठक नहीं कर पाता था।

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मेडिकल जर्नल ने साफ शब्दों में कहा कि भारत ने कोविड पर नियंत्रण के लिए कोई पूर्व तैयारी नहीं की, इसके विपरीत कुंभ और चुनावी रैलियां होती रहीं, इससे स्थिति बिगड़ गई। कोविड पर नियंत्रण के लिए टीकाकरण कारगर है, पर इस मामले में भी भारत की रफ्तार बहुत धीमी है। अबतक केवल दो प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हो पाया है। महामारी के विकराल होने के लिए खुद भारत सरकार जिम्मेवार है।

जर्नल ने सुझाव दिया है कि भारत को दो रणनीति पर कार्य करना होगा। पहला, टीकाकरण को युक्तिसंगत बनाना होगा तथा इसे तीव्र करना होगा। दो बाधाओं को तुरत पार करना होगा। टीके की सप्लाई बढ़ानी होगी (विदेश से भी) तथा ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि सिर्फ शहरों ही नहीं, गांवों में गरीबों का भी टीकाकरण हो, क्योंकि ये आबादी के 65 प्रतिशत हैं।

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द लांसेट ने दूसरा सुझाव दिया है कि भारत को SARS-CoV-2 के संक्रमण को कम करना होगा। सरकार को समय पर सही आंकड़े प्रकाशित करने होंगे। लोगों को बताना होगा कि क्या हो रहा है और महामारी को कम करने के लिए क्या करना होगा। इसमें लॉकडाउन भी शामिल है। जीनोम सिक्वेसिंग को बेहतर करना होगा। कोविड के नए वैरिएंट को ठीक से समझना होगा।

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