‘बुजुर्गों को मुफ्तखोर बता परिवार-समाज को तबाह कर देंगे मोदी’

‘बुजुर्गों को मुफ्तखोर बता परिवार-समाज को तबाह कर देंगे मोदी’

राजद ने पीएम मोदी पर जबरदस्त हमला करते हुए कहा बुजुर्गों को मुफ्तखोर बताना परिवार-समाज को तबाह कर देगा। आज सरकार, कल परिवार मानेगा बुजुर्ग को बोझ।

कुमार अनिल

आज राजद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश की सदियों पुरानी परिवार व्यवस्था, संस्कृति और परंपरा को तबाह करने का गंभीर आरोप लगाया। कहा कि रेल टिकट में बुजुर्ग स्त्री-पुरुष को किराये में छूट मिलती थी। उसे मोदी सरकार ने मुफ्तखोरी कहकर बंद कर दिया है। संस्कृति ऊपर से नीचे फैलती है। ऊपर की देखादेखी नीचे के लोग करते हैं। जब सरकार ही बुजुर्ग को बोझ मान रही है, तब कल परिवार और समाज भी बोझ मानने लगेगा। बुजुर्ग भी आत्महीनता के शिकार होंगे।

राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि पहले गरीब को मुफ्तखोर बताकर गैस सब्सिडी खत्म की गई। फिर छात्रों को मुफ्तखोर बताकर कॉलेज-विवि में फीस बढ़ाई गई। मुंबई आईआईटी के छात्र फीस में बेतहाशा वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। अब बुजुर्ग को मुफ्तखोर बताकर रेल टिकटों में रियायत समाप्त कर दिया गया।

चितरंजन गगन ने कहा कि प्रधानमंत्री फ्री रेवड़ी कल्चर समाप्त करने के नाम पर गरीब और बुजुर्ग के प्रति सरकार की जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। हमारे राष्ट्र निर्माताओं ने भारत को कल्याणकारी राज्य बनाया था। प्रधानमंत्री मोदी अब देश को मुनाफाखोर राज्य में तब्दील कर रहे हैं। मुनाफे के लिए चाहे बुजुर्ग की लाठी छीन लेनी हो या गरीब का सहारा। पहले सरकार बुजुर्ग की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी मानती थी। इसीलिए सरकार ने ओल्ड एज होम सहित कई योजनाएं शुरू की थीं। अब प्रधानमंत्री मोदी रेवड़ी कल्चर समाप्त करने के नाम पर लूट का राज्य बना रहे हैं।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि सरकार बुजुर्गों को बोझ समझना बंद करे। हमारे बुजुर्गों ने न सिर्फ परिवार को खुशहाल किया, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दिया। उनके पास अनुभव है। उनका सम्मान करना हमारी संस्कृति का अटूट हिस्सा रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 60 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के 10.4 करोड़ लोग हैं। इनमें 5.1 करोड़ पुरुष और 5.3 करोड़ महिलाएं हैं। केंद्र के फैसले से परिवार, संस्कृति और परंपरा तबाह हो जाएगी।

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