CM आवास छोड़ BJP को लोभी साबित किया, ठाकरे का कद बढ़ा

महाराष्ट्र में भले ही उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री की कुर्सी गवां दें, लेकिन राज्य की राजनीति में उनका कद किसी भी भाजपा नेता से बढ़ गया है।

महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार रहे या न रहे, लेकिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का राज्य की राजनीति में कद बढ़ गया है। जब उनकी पार्टी के विधायक गुवाहाटी पहुंच गए, तो उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी का मोह नहीं है। बस विधायक लौट आएं। विधायक जिसे कहेंगे, उसे मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। उन्हें पद छोड़ने में एक मिनट नहीं लगेगा। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री आवास छोड़ दिया और परिवार के साथ अपने निजी आवास मातोश्री चले गए। यह साधारण घटना नहीं है। आज की राजनीति में कोई मुख्यमंत्री आवास इस तरह छोड़ता है क्या! नहीं, बिल्कुल नहीं।

भाजपा ने एक काम किया है। पहले दलबदल को अनैतिक माना जाता था। पैसा लेकर या पद के लालच में दल बदल को बहुत खराब माना जाता था। अब भाजपा और गोदी मीडिया ने इसे सुंदर सा नाम दे दिया है- ऑपरेशन लोटस या ऑपरेशन कमल। गोदी मीडिया जितना भी दलबदल को सुंदर नाम दे, पर आम लोग खुश तो नहीं ही होते। निराश होते हैं। आम लोग आज भी अपने नेताओं से ईमानदारी, सेवा की उम्मीद करते हैं। जनता का यह भाव अभी मरा नहीं है, जिंदा है। इसीलिए उद्धव ठाकरे का मातोश्री छोड़ना हर शिव सैनिक को छू गया होगा। आम शिव सैनिकों का सिर झुका नहीं होगा, बल्कि उसे यह अच्छा लगा होगा।

उद्धव ने मातोश्री छोड़कर यह संदेश दिया कि उन्हें सत्ता का मोह नहीं है, बल्कि सत्ता का लोभ भाजपा को है, जो पर्दे के पीछे से सारा खेल कर रही है।

उद्धव के इसी तरह के कदमों ने शिव सैनिकों में जोश भर दिया है। अब महाराष्ट्र के कई इलाकों से पार्टी तोड़नेवाले शिंदे के पोस्टरों पर कालिख पोतने की खबरें आ रही हैं। जो लोग समझ रहे हैं कि कुर्सी जाने के बाद उद्धव की राजनीति खत्म हो जाएगी, वे गलतफहमी में हैं। भले ही आज उन्हें कुर्सी गंवानी पड़े, लेकिन कल जब विधानसभा चुनाव होगा, तब उद्धव पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरेंगे।

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By Editor


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