गुलाम-चाटूकार मीडिया का होगा घेराव, जलाएंगे पुतला

गुलाम-चाटूकार मीडिया का होगा घेराव, जलाएंगे पुतला

गुलाम और चाटूकार मीडिया, पत्रकारों का घेराव करेगा मूलनिवासी। संगठन ने कहा है कि ऐसे पत्रकारों का पोस्टर साटा जाएगा, उनका पुतला जलाया जाएगा।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश दिल्ली ,बिहार समेत लगभग पूरे भारत में पत्रकारिता की स्थिति बिल्कुल गुलामों वाले और चाटुकारिता की कर दी गई है। अखबार के बिके हुए दलाल घुसखोर मालिक अखबार को ऐसा पर्चा बनाकर छाप रहे हैं, जिसमें सिर्फ एक दल और कुछ नेताओं के महिमागान व महिमामंडन होता है, बाकी पूरे विपक्ष एवं जन समस्याओं की अनदेखी की जा रही है।

इसके खिलाफ जनता जाग रही है ,क्योंकि यह गोरखधंधा 7 साल से चल रहा है। जनता का आक्रोश इनके खिलाफ कायम है। उसको गोलबंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब ऐसे शातिर लुटेरे अखबार मालिकों, चैनल मालिकों के खिलाफ धरना, प्रदर्शन होगा। इनको कोर्ट में घसीटा जाएगा। साथ ही इनके साथ काम करने वाले दलाल पत्रकारों, छायाकारों की भी पहचान करके इनकी हरकतों को भी उजागर किया जाएगा।

इनके नाम और धंधे के पोस्टर छापे जाएंगे ताकि आम जनता इन अखबारों को नहीं खरीदे। इन टीवी चैनलों को नहीं देखें।
अब गुलाम अडानी अंबानी परस्त मौजूदा मीडिया को नंगा करके देश में सोशल मीडिया पर समानांतर समाचार माध्यम से लाने पड़ेंगे। इसके लिए जनता एकजुट हो रही है।

वास्तव में पत्रकारिता के नाम पर व्याभिचारिता हो रही है। सरकार से करोड़ों अरबों के विज्ञापन के नाम पर घूस लेकर उनकी चाटुकारिता की जा रही है। अखबारों को सरकारी पत्रिका बनाकर रख दिया गया है।

हजारों किसानों और मजदूरों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं के लाख प्रार्थना और गुजारिश करने के बाद भी कहीं कोई सच्चाई और तथ्यपरक समाचार का प्रकाशन नहीं हो रहा है। बिहार, यूपी, मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत 15 ,16 राज्यों में बहुत बुरी स्थिति है। समाचारों के रूप में सरकारी विज्ञापन छापे जा रहे हैं।

दिल्ली में आयोजित हमारी 10-10 लाख (किसान और मजदूरों) की रैलियों को किसी अखबार या टीवी में कोई जगह कभी नही मिली । लोग कहते हैं कि आप इतनी अच्छी बात करते हैं तो कुछ छपता क्यों नही ,
अबे मूर्खों, क्या हम तुम्हारे कान में आ कर कहें, बने रहो शुतुर्मरग, सब से संगठित अनुशासित और अपने खुद के पैसे से काम करने वाले सिर्फ हम हैं।

अब छापो / दिखाओ या न दिखाओ, हमें बहुत अच्छी तरह से मालूम है कि यह पत्रकार नही सत्ता के चाटूकार और उन पूंजीपतियों के दलाल हैं। जिनके कथित मीडिया हाउस मे वे मानसिक व्यभिचार करते हैं। जनता को उल्लू बनाने वाले झूठी बातें झूठी खबरें दिखाते हैं। पूरी जनता को बरगला रहे हैं । देश को 100 साल पीछे ले जा रहे हैं यह मीडिया वाले।

इन परिस्थितियों में सिर्फ दुख तब होता है जब कोई महिला सम्पादक भी महिलाओं से संबंधित गम्भीर समस्याओं को अनदेखा करती है, क्यों कि वह भी लुटेरे पूंजीपतियों की गुलाम हो गई है। 16 सितम्बर को अखिल भारतीय महिला समिति की आगरा शाखा ने जिला मुख्यालय पर संसद मे आये महिला आरक्षण बिल के 25 साल बीत जाने के बाद भी पास न किये जाने के खिलाफ, जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुये जिला अधिकारी को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिस मे उक्त बिल को जल्दी पारित करने की जोरदार मांग की गयी ।

वहां पर मौजूद तमाम कथित पत्रकारों को मांग पत्र की एक एक कॉपी भी दी गई ।
फिर दुबारा से आगरा से छपने बाले तीन मुख्य अखबार अमर उजाला , हिन्दुस्तान और जागरण समाचार दफ्तरों में जाकर दिया गया। whatsAp से मांग प्रति और प्रेस विज्ञपती भेजी गयी , सभी के संपादकों से फोन पर भी बात की गयी जिन में से एक महिला भी थी। दूसरे दिन किसी ने एक लाइन भी नहीं छापी , महिला सम्पादक बाले अखबार मे तो सम्बंधित पेज पर तो राधे मां का कीर्त्तन , महिलाओं की खोपड़ी रखे घडो को रखे मंगल कलश यात्रा आदि आदि के सचित्र बडे बडे समाचार थे ।

जब इस देश की आबादी मे 50 प्रतिशत महिलाओं की बहुसन्ख्या को अधिकार चाहिये ही नही, वह मनु स्मृति वाले संघ / भाजपा की समर्थक हैं तो कभी कभी लगता है कि बाबा साहब ने हिन्दू कोड बिल लाना ही नही चाहिये था । लेकिन जो गलती उस समय संविधान निर्माताओं और बाबा साहब से हो गई है, उसे अब वर्तमान का बहुजत समाज सुधारेगा।

सबसे पहले इन अखबारों का बायकाट दिया जाएगा । टेलीविजन चैनलों का बहिष्कार दिया जाएगा और इनके काले धंधों, काले कारनामों को उजागर किया जाएगा। पोस्टर के माध्यम से , सोशल मीडिया के माध्यम से ।
इसलिए ऐसे बिके हुए मीडिया संस्थानों को हम अंतिम चेतावनी देते हैं कि तुम सुधर जाओ, वरना पूरे देश में तुम्हारे खिलाफ गोलबंदी हो रही है और अगले महीने से तुम सब बिके हुए दलालो और उनके मालिकों को नंगा करने , उनके कारनामों को सड़क पर पोस्टरों के माध्यम से बताने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा । कवरेज नहीं करने वाले दलालों ,पत्रकारों और छायाकारों को सड़क पर देखते ही मुंह पर कालिख पोत कर गधे पर बैठाकर घुमाया जाएगा। हम हैं (भारत के मूलनिवासी, मूल नागरिक)

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