मणिपुर के मुख्यमंत्री के पांच नकारा फैसले, जिससे जल रहा प्रदेश

मणिपुर के मुख्यमंत्री के पांच नकारा फैसले, जिससे जल रहा प्रदेश

मणिपुर के मुख्यमंत्री के पांच नकारा फैसले, जिससे जल रहा प्रदेश। मैतेई बहुसंख्यक हैं, कूकी आदिवासियों की संख्या कम है। जानिए CM के नकारापन से कैसे फैली हिंसा।

मणिपुर में आदिवासी समुदाय की दो महिलाओं को नंगा करके खुलेआम सड़क पर परेड कराने, गैंगरेप की घटना से देश उबल रहा है। यहां के मुख्यमंत्री का नाम है एन बीरेन सिंह। उनके नकारापन का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है कि जब कूकी आदिवासी महिलाओं के साथ जुल्म का वीडियो वायरल हुआ, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाएं तो सौ से ज्यादा हुई हैं। स्पष्ट है मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को सबकुछ मालूम था। बड़ा सवाल यह है कि सौ से ज्यादा रेप और आदिवासी महिलाओं को नंगा करके घुमाने की घटना की जानकारी उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह को दी थी या नहीं। अगर दी थी, तो गृहमंत्री ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की और अगर गृहमंत्री को जानकारी नहीं दी, तो यह और भी बड़ा अक्षम्य अपराध है।

मणिपुर में बहुसंख्यक आबादी मैतेई समुदाय की है। इनकी मांग है कि इन्हें एसटी यानी जनजाति का दर्जा दिया जाए। उधर मणिपुर की जनजाति कूकी इस मांग का विरोध करती रही है। विवाद इसी से शुरु हुआ था। मुख्यमंत्री बीरेन सिंह बहुसंख्यक मैतेई समुदाय के हैं।

मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने विवाद शुरू होने के बाद इसके हल के लिए उपाय करने के बजाय बहुसंख्यक मैतेई का पक्ष लिया। जो भी मुख्यमंत्री बीरेन सिंह से सवाल करता, उसे कूकी कह कर अपमानित किया जाता रहा और मांग को खारिज किया जाता रहा। इस तरह कूकी के खिलाफ माहौल बनता रहा।

मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने म्यांमार के घुसपैठियों के खिलाफ अभियान शुरू किया। इस दरम्यान भी कूकी पर हमले होते रहे। जो भी मुख्यमंत्री का विरोध करता, उसे म्यांमार का नागरिक कह कर अपमानित किया जाता रहता।

मणिपुर में हिंसा भड़कने के बाद मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने आनन-फानन में राज्य के DGP P. Doungel को पद से हटा दिया तथा नया डीजीपी नियुक्त किया। P. Doungel (पी. डोंगेल) कूकी समुदाय के हैं। उन्हें पद से हटाने के बाद एक नया पद रातों रात सृजित किया गया और डोंगेल को उस पद पर नियुक्त कर दिया गया। कूकी समुदाय के डीजीपी को पद से हटाने तथा उन्हें शंट करने का भी राज्य में गलत संदेश गया और हिंसक तत्वों को बल मिला।

जगह-जगह से पीड़ितों के बयान आ रहे हैं कि उन्हें पुलिस ने भीड़ के हाथ सौंप दिया। कई स्थलों से यह भी रिपोर्ट है कि पुलिस ने उग्र भीड़ पर कोई कोर्रवाई नहीं की। इससे कूकी समुदाय पर हमले बढ़ते रहे।

मुख्यंमत्री बीरेन सिंह पर पहले भी आदिवासियों को गांव से बाहर करने तथा चर्च को तोड़ने के आरोप लगते रहे हैं। मणिपुर में हिंसा में चर्चों को जानबूझ कर निशाना बनाया गया। इसे रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने कोई कदम नहीं उठाया।

बीरेन सिंह का जन्म 1 जनवरी, 1961 को हुआ। वे राज्य के लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। 2016 में भाजपा में शामिल हुए। 2017 में मुख्यमंत्री बने। पिछले साल 2022 में जब वे दुबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, तब भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा तथा कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे।

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