मोदी काल के दो वर्षों में हजार से ज्यादा दलित-पिछड़ों ने छोड़ी IIT की पढ़ाई

मोदी काल के दो वर्षों में हजार से ज्यादा दलित-पिछड़ों ने छोड़ी IIT की पढ़ाई

मोदी काल के दो वर्षों में हजार से ज्यादा दलित-पिछड़ों ने छोड़ी IIT की पढ़ाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू ने कहा दो वर्षों में 2500 छात्रों ने IIT की पढ़ाई छोड़ी।आधे आरक्षित वर्ग के।

देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2019 के एक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि सिर्फ दो वर्षों में 2500 छात्र-छात्राओं ने आईआईटी की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। उन्होंने कहा कि इस मामले पर संवेदनशीलता के साथ विचार हो। उन्होंने यह भी कहा कि आत्महत्या की दुखदाई घटनाएं कई शिक्षण संस्थानों में हुई हैं। मेरी बात किसी संस्थान विशेष तक सीमित नहीं है। यह पूरे शिक्षा जगत के लिए चिंता का विषय है।

प्रेसिडंट ऑफ इंडिया ने ट्वीट किया-केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 में, दो वर्षों के आंकड़ों के आधार पर किए गए एक विश्लेषण से यह ज्ञात हुआ है कि लगभग 2500 विद्यार्थियों ने IITs में अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। उन विद्यार्थियों में लगभग आधे विद्यार्थी आरक्षित वर्गों से आए थे। Drop-outs की समस्या पर बहुत संवेदनशीलता के साथ विचार करने और समाधान निकालने की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति ने एक संवेदनशील मुद्दा उठाया है, जिस पर केंद्र सरकार, आईआईटी के प्रबंधकों सहित सभी पक्षों को गंभीरता से विचार करना चाहिए कि आखिर दो वर्षों में इतनी बड़ी संख्या में छात्रों ने पढ़ाई क्यों छोड़ी।

रह-रहकर आईआईटी में दलित-कमजोर वर्ग के छात्रों को परेशान करने की खबरे आती रहती हैं। कई बार तो इस वर्ग के छात्र आत्महत्या करने को मजबूर हुए। खबरें आईं कि उन्हें कमजोर जाति का होने के कारण प्रताड़ित किया गया। हर बार प्रबंधन इससे इनकार करता रहा है। इसी साल फरवरी में गुजरात के अनुसूचित जाति के छात्र दर्शन सोलंकी ने रुड़की आईआईटी में आत्महत्या कर ली। वह पहले वर्ष का छात्र था। उसकी उम्र केवल 18 वर्ष थी। उसके सहपाठियों ने बताया था कि अनुसूचित जाति का होने के कारण उसे प्रताड़ित किया गया।

नौकरशाही डॉट कॉम ने गूगल पर आईआईटी छात्र ने की आत्महत्या टाइप किया, तो आईआईटी में छात्रों की आत्महत्या की खबरों का लंबा सिलसिला दिखा। इस पर जरूर विचार किया जाना चाहिए।

जाति के नाम पर भेदभाव के साथ ही पढ़ाई के प्रेशर की बात भी सामने आती रहती है। इस पक्ष पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू ने इससे पहले भी देश के गंभीर सवाल उठाए हैं। दो महीना पहले उन्होंने भारत के जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की समस्याओं पर सबका ध्यान खींचा था। वे लगातार जरूरी मुद्दे उठा रही हैं। अब उन्होंने दलित-पिछड़े छात्रों के आईआईटी की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने का मसला उठाया है। इस पर सभी पक्षों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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