बिहार विधानसभा चुनाव से पहले तेजस्वी यादव की एक पहल से नीतीश कुमार को भारी नुकसान होना अब तय माना जा रहा है। तीन दिन पहले उन्होंने पासी महासंघ के जरिये ताड़ी व्यवसायी जुटान में कहा था कि उनकी सरकार बनी, तो शराबबंदी कानून से ताड़ी को बाहर किया जाएगा। अब तीन दिनों में ही उनके इस बयान का असर दिखने लगा है। एक तरफ जहां चिराग पासवान ने समर्थन कर दिया है, वहीं जदयू पूरी तरह बौखला गया है। जीतनराम मांझी की पार्टी भी तेजस्वी के इस बयान से परेशान है। माना जा रहा है कि पासी समाज के वोट से इस बार नीतीश कुमार को हाथ धोना पड़ सकता है।
जदयू की बौखलाहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब तेजस्वी ने ताड़ी को उद्योग का दर्जा देने की बात की, तो जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने राजद को ताड़ी पार्टी कहा और मजाक उड़ाया। लेकिन दो दिनों में ही उन्हें अंदाजा हो गया कि तेजस्वी की घोषणा का पासी समाज ने स्वागत किया है। पासी समाज में काफी चर्चा है। अब उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि किस प्रकार पासी समाज को अपने साथ रोकें।
इस बीच लोजपा प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कह दिया कि ताड़ी कोई नशीला पदार्थ नहीं है। यह प्राकृतिक पेय है। उनके बयान को तेजस्वी की घोषणा का समर्थन माना गया। इसके बाद से पासी समाज में हलचल और बढ़ गई। नीचे संदेश यही गया है कि अगर एनडीए की सरकार बनी, तो ताड़ी पर प्रतिबंध जारी रहेगा और तेजस्वी की सरकार बनी, तो प्रतिबंध हटेगा।
अब आज जदयू नेताओं के स्वर बदले हुए दिख रहे हैं। जदयू ने अब तेजस्वी का मजाक उड़ाने के बजाय कहा कि हमारी सरकार बनने पर नीरा उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन लोग पूछ रहे हैं कि सरकार तो आपकी ही है, तो फिर नीरा उद्योग को बढ़ावा क्यों नहीं दिया। वैसे राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार तेजस्वी की घोषणा से नीतीश पासी समाज में अलग-थलग पड़ गए है।