टूटते-टूटते बची भाजपा, अब डैमेज कंट्रोल में जुटी

टूटते-टूटते बची भाजपा, अब डैमेज कंट्रोल में जुटी

टूटते-टूटते बची भाजपा, अब डैमेज कंट्रोल में जुटी। भाजपा की व्यूह रचना फेल। जदयू को तोड़ने चले थे, इससे नाराज उसके कई विधायक पाला बदलने को हो गए तैयार।

बिहार में भाजपा की फजीहत हो गई। वह जदयू को तोड़ने के चक्कर में थी। उसी ने हवा उड़ाई कि नीतीश कुमार इंडिया गठबंधन से नाता तोड़कर एनडीए में शामिल होंगे। मीडिया उनके हाथ में है। भाजपाई मीडिया ने इस खबर को 24 घंटे खूब हवा दी। इसका असर यह हुआ कि भाजपा के कई विधायकों और सांसदों में भय फैल गया कि उनका टिकट कट सकता है। इसके बाद कई विधायकों ने राजद से संपर्क करना शुरू कर दिया। स्थिति यह हो गई कि इस खबर को तुरत नहीं रोका जाता, तो भाजपा में ही बगावत के सुर उभरने लगते। व्यूह रचना फेल होता देख भाजपा ने पलटी मारी और कहना शुरू कर दिया कि नीतीश के लिए भाजपा के दरवाजे बंद हैं। वे बार-बार भाजपा का दरवाजा नीतीश कुमार के लिए बंद है कह कर दरअसल अपने विधायकों और सांसदों को आश्वस्त कर रहे हैं कि उनका टिकट नहीं कटेगा। इस बीच खबर है कि भाजपा अपने नाराज नेताओं को मनाने में जुट गई है।

मालूम हो कि जदयू की बैठक 29 दिसंबर को होने वाली है। मीडिया ने खबर चलाई कि ललन सिंह की लालू से करीबी के कारण नीतीश कुमार नाराज हैं और इसीलिए वे उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं। इसके बाद यह खबर भी चलाई गई कि नीतीश कुमार एनडीए में शामिल होंगे। इससे भाजपा के भीतर ही सनसनी फैल गई। नीतीश के एनडीए में जाने का अर्थ है कि भाजपा के कई सांसदों का टिकट कटना। 2015 विधानसभा चुनाव में कई विधायकों का टिकट कटना। खासकर पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति के विधायकों में ज्यादा चिंता देखी गई। उन्हें आभास हो गया कि नीतीश कुमार के एनडीए में आने के बाद पिछड़ों-अतिपिछड़ों के एकमात्र नेता तेजस्वी यादव बन कर उभरेंगे और तब उनका चुनाव जीतना असंभव हो जाएगा।

इस बीच दिल्ली से खबर मिल रही है कि कल जदयू की बैठक में भाजपा पर कड़े हमले होंगे। प्रस्ताव तैयार हो रहा है, जिसमें भाजपा को दलित विरोधी, पिछड़ा विरोधी, अतिपिछड़ा विरोधी कहा जाएगा। कहा जाएगा कि भाजपा मनुवादी है और वह आंबेडकर के बनाए संविधान को खत्म करना चाहती है।

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