अपहरण से रिहाई तक: नेपाल के अम्बानी के अपहरण की रोंगटे खड़ी करने वाली पूरी कहानी

नेपाल के अम्बानी माने जाने वाले सुरेश केडिया के अपहरण और रिहाई की दास्तान रक्सौल से अभिषेक कुमार पांडेय की रिपोर्ट में पढिये. रोंगटे खड़े कर देने वाले इस अपहरणकांड ने चम्पारण पुलिस का नाम रौशन किया है.

केडिया को छुडाने के बाद चम्पारण पुलिस

केडिया को छुडाने के बाद चम्पारण पुलिस

पिछले 26 मई को भारत के पडोसी देश नेपाल के बीरगंज से नेपाल के अम्बानी कहे जाने वाले सुरेश केडिया पुरे 66 घंटे बाद बरामद कर लिए गये जबकि 72 घंटे बाद वो अपने परिज़न को सकुशल दिखाई दिए. उक्त बावत रक्सौल थाना में बेतिया एसपी विनय कुमार व मोतिहारी एसपी जीतेन्द्र राणा ने संयुक्त रूप से प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर बताया की सुरेश केडिया का अपहरण बीरगंज में गुरुवार की संध्या 5-6 के बिच में हुआ था जबकि उनकी रिहाई रविवार दोपहर को 12 बजे हुई.

अधिकारीद्वय ने बताया कि अपहरण में प्रयुक्त की गयी गाड़ी BRO5PA 3239 नंबर की स्कॉर्पियो स्थानीय निवासी सह पूर्व विधानसभा प्रत्याशी धुरेन्द्र साह का है जिसे मोतिहारी कोर्ट में कार्यरत स्थानीय भरवलिया निवासी ताईद रंजन कुमार ओझा ने भाड़े पर ले रखा था जो  जेल में बंद कुख्यात बबलू दुबे का शागिर्द है.

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पुलिस ने अपहरण में बरामद वाहन के साथ हथियार और प्रयुक्त मोबाइल भी बरामद कर लिया है .वहीँ श्री केडिया के रिहाई के बाद उनके परिजन काफी खुश नजर आ रहे है और उन्होंने बिहार पुलिस को धन्यबाद दिया है.

बब्लू दुबे व रंजन गिरोह

जीतेन्द्र राणा, एसपी मोतिहारी व विनय कुमार, एसपी बेतिया ने संयुक्त रूप से कहा की सुरेश केडिया के अपहरण के बाद जब नेपाल पुलिस ने उनसे संपर्क साधा और छापेमारी कर बरामद करने को कहा तो सबसे पहले मोतिहारी और बेतिया से जुड़े सीमावर्ती इलाको में गहन चेकिंग की जाने लगी पर जब बरामद नहीं हुआ तो एक स्पेशल टीम तैयार कर सबसे पहली प्राथमिकता सुरेश केडिया के सकुशलता पर दी गयी वहीँ इसके बाद तकनीकी प्रक्रिया पर ध्यान देते हुए सीमाई इलाको में चर्चित गैंग पर ध्यान दिया गया जिसमे सबसे पहला नाम बबलू दुबे का आया जिसके कॉल डिटेल के आधार पर रंजन को पकड़ा गया और उसके बाद जब पुलिस के सामने भेद खुलने लगा तो अपराधी डर के मारे सुरेश केडिया को कोटवा में एनएच पर छोड़ भाग खड़े हुए.

 

वहीं इसमें नेपाल-भारत दोनों ही देश के अपराधी की संलिप्ता है जिसे चिन्हित कर लिया गया है जिसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जायेगा. वहीँ उन्होंने यह भी बताया की अपहरण के बाद श्री केडिया को वाहन में बड़े ही खतरनाक तरीके से ले जायेगा गया जहाँ उन्हें हलकी चोट भी आई पर अब उनका मेडिकल चेक अप करा लिया गया है जो पूरी तरह से स्वस्थ्य है.

कौन है बबलू दुबे और रंजन कुमार ओझा—

बबलू दुबे वर्ष 2013 में बिहार पुलिस का 50 हज़ार का इनामी था जिसे गुप्त सुचना के आधार पर नेपाल पुलिस के सहयोग से पूर्वी चम्पारण के तत्कालीन एसपी विनय कुमार ने पकड़ा था जो मोतिहारी जेल में बंद था परन्तु पंचायत चुनाव के पूर्व चुनाव में गड़बड़ी न हो इसके लिए उसे बक्सर जेल में सिफ्ट कर दिया गया था.

बबलू दुबे भारी मात्रा में नेपाल और सीमाई इलाको से लेवी वसूलता था. वहीँ रंजन झा पहली बार तब चर्चा में आया जब कुछ माह पूर्व रक्सौल के एक जमीन के कारोबारी मनोज सिंह को गोली मारी थी. रंजन रक्सौल के भरवलिया गाँव निवासी एक अवकाश प्राप्त शिक्षक का पुत्र है जो मोतिहारी में ताईद का काम करते हुए अपराधिक घटनाओं को अंजाम देता था.

चार दिनों में रोटी का टुकड़ा भी नसीब नहीं

नेपाल में राजहंस ब्रांड के मालिक सुरेश केडिया नेपाल के धीरू भाई अम्बानी माने जाते है जो देखने में बिलकुल आम आदमी लगते है. उन्होंने अपने दिए बयान में कहा कि जब उनका अपहरण हुआ तब से एक ही जगह पर अपराधियों ने उन्हें रखा था. आज 4 दिनों तक उन्हें रोटी का एक टुकड़ा तक नसीब नहीं हुआ है अपराधी उन्हें पानी में कुछ मिलाकर देते थे जिससे वो बेहोश हो जाते थे, उनके हाथ-पैर बंधे हुए थे और आज पुलिस की बहादुरी और छापेमारी से डरकर दोपहर के समय आँखों पर पट्टी बांध और कला चश्मा लगा कर एक बाइक पर बिच में बैठा कर एनएच पर छोड़ दिया.

इंस्पेक्टर रवि व रौशन कुमार की काबलियत

रिहाई के बाद राहत महसूस कर रहा हूँ और भारतीय पुलिस को धन्यबाद देता हूँ.. कौन थे छापेमारी टीम में शामिल—छापेमारी टीम में यासीन भटकल को पकड़ने वाले टीम के इंस्पेक्टर रवि और इंस्पेक्टर दिलीप जो 2007 बैच के दरोगा है जिन्हें यासीन भटकल के गिरफ़्तारी के बाद गैलेंट्री अवार्ड से नवाजा गया था और इंस्पेक्टर में पदोन्नति की गयी थी, जबकि इनके अलावे सब इंस्पेक्टर कुंदन कुमार, विजय कुमार यादव व सब इंस्पेक्टर रौशन कुमार शामिल है.

.वहीँ इस मामले में रक्सौल के जाबाज़ डीएसपी राकेश कुमार ने भी अहम् भूमिका निभाया है. क्या हुआ बरामद—अपहरण में प्रयुक्त वाहन के अलावे 1 पिस्टल व 4 गोली के साथ 3 मोबाइल फ़ोन बरामद किया गया है..बरामद मोबाइल में एक मोबाइल एक्सक्लूसिव है जो केवल अपहरण के लिए ही प्रयोग में लाया गया था. बहरहाल जो कुछ हो श्री केडिया के रिहाई के बाद भारत और नेपाल पुलिस ने चैन की सांस ले लिया है और स्थानीय दूतावास में श्री केडिया को उनके परिजनों को सौपने के बाद आगे की रणनीति बना कर अपराधियों को दबोचने के मूड में है..उक्त मौके पर रक्सौल थाना प्रभारी अशोक कुमार, हरैया थाना प्रभारी सज्जाद गद्दी, व्यवसाई महेश अग्रवाल व राजकुमार गुप्ता आदि उपस्थित थे.

नेपाल के अम्बानी माने जाने वाले सुरेश केडिया के अपहरण और रिहाई की दास्तान रक्सौल से अभिषेक कुमार पांडेय की रिपोर्ट में पढिये. रोंगटे खड़े कर देने वाले इस अपहरणकांड ने चम्पारण पुलिस का नाम रौशन किया है. पिछले 26 मई को भारत के पडोसी देश नेपाल के बीरगंज से नेपाल के अम्बानी कहे जाने वाले सुरेश केडिया पुरे 66 घंटे बाद बरामद कर लिए गये जबकि 72 घंटे बाद वो अपने परिज़न को सकुशल दिखाई दिए. उक्त बावत रक्सौल थाना में बेतिया एसपी विनय कुमार व मोतिहारी एसपी जीतेन्द्र…

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