आप भी जानिए, दूसरों को भी बताइए: पीएमसीएच में बिल्कुल मुफ्त में होता है टेढ़े-मेढ़े पैरों का इलाज

-पूर्वी भारत में इकलौता बड़ा सेंटर है पीएमसीएच
-क्लबफुट क्योर के तहत होता है पूरा इलाज
-सारा खर्च उठाता है अस्पताल
-नवजात से लेकर 16 साल तक के किशोर का भी होता है इलाज
नौकरशाही डेस्क, पटना

आप भी जानिए, दूसरों को भी बताइए:

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बच्चों का जन्म से पैर टेढ़ा मेढ़ा हो जाने को विकलांगता की श्रेणी में रखने वालों की कमी नहीं है लेकिन यह एक बीमारी है और इसका पूरा इलाज संभव है. पीएमसीएच में यदि आप आएं तो ऐसे मरीजों का पूरा इलाज किया जाता है वह भी बिना किसी शुल्क के. नवजात बच्चे जिनकी उम्र 15 दिन से लेकर 15-16 साल तक है यदि उनके पैरे टेढ़े मेढ़े हो चुके हैं, जिन्हें क्लबफुट भी कहा जाता है तो वे यहां इलाज के लिए आ सकते हैं. सभी खर्च अस्पताल द्वारा ही उठाया जाता है और यहां आने के बाद बच्चे स्वस्थ होकर अपने पैरों पर चलकर जाते हैं. पीएमसीएच पूर्वी भारत का ऐसा केंद्र है जो अपने आप में खास है. यहां इलाज कराने के लिए पश्चिम बंगाल से लेकर मणिपुर, असम के भी मरीज आ चुके हैं. अब तक 950 बच्चों का इलाज किया जा चुका है. वे सभी अपने पैरों पर चल रहे हैं और इसके डायरेक्शन में अभी 50 से 70 मरीजों का इलाज किया जा रहा है जो जल्द ही अपने पैरों पर खड़े होकर दुनिया के साथ कदमताल करेंगे.
बिहार में छह और सेंटर बनाये गये
पीएमसीएच में क्लबफुट क्योर के प्रमुख डॉ अजय कुमार मानव ने बताया कि इसकी सफलता को देखते हुए बिहार में छह और सेंटर बनाये गये हैं, जहां पर उनका इलाज किया जा रहा है. क्योर क्लबफुट बिहार का पीएमसीएच में मुख्य केंद्र है और इसका लाभ बाकी जिलों को भी मिल सके इसके लिए पटना के ही एनएमसीएच, एम्स, आइजीआइएमएस के अलावा गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और दरभंगा के मेडिकल कॉलेजों में सब सेंटर बनाये गये हैं. आमलोग इसके लिए जागरुकता फैलाएं तो बच्चों को सशक्त बनाया जा सकता है.
24 घंटे कर सकते हैं हेल्पलाइन पर कॉल
आप भी यदि अपने आसपास टेढ़े मेढ़े पैर वाले बच्चों को देखते हैं जिनकी उम्र 15 से 16 साल तक है तो क्योर क्लबफुट बिहार के हेल्पलाइन नंबर 8969992027 पर कॉल कर सकते हैं. इस पर आपको हमेशा छुटकारा पा सकते हैं. क्योर क्लबफुट के स्टेट प्रोग्राम को आर्डिनेटर रंजना रूठ जॉन ने बताया कि हमारे यहां 16 साल की लड़की पूरी तरह स्वस्थ होकर गयी है. संतो नाम की लड़की पश्चिम बंगाल की रहनेवाली थी और इसके अलावा 17 साल की नालंदा निवासी लड़की सरिता का भी इलाज हुआ और वह स्वस्थ होकर गयी. छोटे बच्चों की संख्या तो सैकड़ों में है.
क्या कहते हैं आंकड़े?
– हर 800 बच्चों में एक बच्चा क्लबफुट
– केवल 5000 रुपये तक आता है सरकार का खर्च
– तीन चरणों में किया जाता है तीन महीने तक इलाज
क्या कहते हैं मेडिकल डायरेक्टर?
हमारे यहां आने पर टेढ़े मेढ़े होने की विकृति का पूर्ण इलाज बिल्कुल मुफ्त में किया जाता है. इसके लिए एक डेडिकेटेड यूनिट हैं जिसमें छह डाक्टर और उनके सहयोगी लगातार काम करते हैं. तीन महीने तक हम मरीज की मॉनिटिरंग करते हैं. इसके बाद उनके अभिभावक को निगरानी रखना होता है. हम उन्हें फॉलोअप भी करते हैं. हम राज्यवासियों से अपील करते हैं कि वे ऐसे मरीजों का इलाज करवाने में पहल करें.
-अजय कुमार मानव, मेडिकल डायरेक्टर, इस्टर्न रिजन, क्लबफुट क्योर

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