इस रूदाद को पढ़िये जो बताती है कि मंडल कमीशन फेज-2 आंदोलन अब शुरू होने को है

ओबीसी आरक्षण आंदोलन ने देश के सामाजिक-राजनीतिक माहौल को जड़-मूल से बदल डाला था. मुलायम ताकत के रूप में उभरे थे.यूपी में फिर चुनाव सर पर है और मंडल कमीशन की बाकी सिफारिशें लागू करवाने की सुगबुगाहट के बीच उस वक्त के युवा छात्र चंद्रभूषण सिंह यादव मंडल आंदोलन की रूदाद बता रहे हैं.mulaya.Mandal.commission

जब मण्डल कमीशन की लड़ाई पूरे उफान पर थी ,तब मैं बीएससी(कृषि)का विद्यार्थी था।मण्डल कमीशन के बारे में बहुत डीपली तो पता नही था लेकिन यह समझता था कि इसमें कुछ ऐसा है जो युगांतरकारी परिवर्तन लाने वाला है।

 

मण्डल की लड़ाई में मैं तब अपने कालेज से अकेला छात्र था जो कूदा था।उस समय या तो सम्पूर्ण छात्रनेता/छात्र मण्डल के विरोध में थे या मौन थे,उसके समर्थन में उतरना अत्यंत ही जोखिम भरा था।अब मण्डल का समर्थन कर जोखिम कौन उठाये,लिहाजा मण्डल समर्थक छात्रों का चुप रहना ही श्रेयस्कर था।

ब्रह्मण गुरुजी

मैं उस समय अकेला छात्र या छात्रनेता था जिसने मण्डल के समर्थन में क्रमिक अनशन से लेकर,प्रदर्शन तक किया और पुलिस लाठीचार्ज का शिकार भी हुआ।मेरे प्रायः सारे गुरुजन ब्राह्मण समाज से थे जिनकी भृकुटी मुझ पर तन चुकी थी।”एक तो तित-लौकी दूजे चढ़े नीम”,वाली स्थिति मेरी थी,एक तो मैं चन्द्रभूषण सिंह ‘यादव’ लिखके सबकी नजरो में चढ़ा हुआ था दूजे आरक्षण/मण्डल कमीशन का समर्थन कर और भी हाईलाइट हो गया फिर खामियाजा भी भुगतना पड़ा।

 

मुझे मेरे एक गुरूजी ने अपने साले से कहके जो दूसरे कालेज में प्रोफेसर थे जेनेटिक्स में फेल करवा दिया।मैंने रिवैल्यूवेशन तथा सप्लीमेंट्री परीक्षा दी और दोनों में काफी अंतर से पुनः पास किया लेकिन परेशान तो 4 महीने तक हुआ ही।

मुलायम को लिखी चिट्ठी

मण्डल कमीशन की लड़ाई तीव्र रखने के बाद मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह यादव जी को मण्डल कमीशन के बाबत पत्र लिखा था और मण्डल लागू होने पर बधाई सन्देश भेजा था जिसके प्रत्युत्तर में नेताजी ने 26 अक्टूबर 1990 को लिखा था कि “मण्डल कमीशन की सिफारिशें लागू करने के सम्बन्ध में आपके बधाई सन्देश के लिए अनेकानेक धन्यवाद।मुझे विश्वास है कि इस सम्बन्ध में जो भ्रम फैलाया जा रहा है उसको नाकाम करने में हम सब मिलकर कार्य करेंगे।”

 

नेताजी के इस पत्र ने तो मुझमे असीम ऊर्जा भर दिया और मैं मण्डल की लड़ाई को तीव्र करने में और भी जी-जान लगा दिया।

अब भी बाकी है मंडल की लड़ाई
मण्डल कमीशन की लड़ाई अभी शेष है।उसकी संस्तुतियां लागू की जानी बाकी हैं।मण्डल अभी अधूरा है।इसे मूर्त रूप देने की जिम्मेदारी अभी हमे निभानी है।अभी भी मण्डल कमीशन की प्रासंगिकता है।इसमें अभी भी करेंट है।इसे पूर्णतः लागू करने के अभियान मात्र से पूरे देश में पिछड़ों में एक सजग जागृति उत्पन्न होगी इसलिए मैं उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी और नेताजी से लोहिया जी के नारे को उद्धृत करते हुए अनुरोध करूँगा कि “समाजवादियों ने बांधी गांठ,पिछड़े पावें सौ में साठ”के नारे को फलीभूत करने का संघर्ष शुरू हो।

पार्टी व पिछड़ों का कायाकल्प हो जाएगा।नेताजी मण्डल अभी भी प्रासंगिक है,बस इसे धार देने की जरूरत है।

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चंद्रभूषण सिंह यादव, ‘यादव शक्ति’ पत्रिका के प्रधान सम्पादक हैं. छात्र जीवन से ही सामाजिक न्याय के संघर्षों से जुड़े हैं. उत्तर प्रदेश के देवरिया में रहते हैं

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