एक और आईएएस अफसर की गिरफ्तारी की अफवाह कौन फैला रहा है मनु महाराज साहब?

बीएसएससी परीक्षा पेपर लीक मामले में पिछले चार दिनों से ओएसडी सीके अनिल के नाम पर गिरफ्तारी वारंट की अफवाह उड़ नहीं रही, बल्कि उड़ाई जा रही है. यह अफवाह मीडिया तक कौन पहुंचा रहा है. क्या मीडिया में सूत्रों के हवाले से गिरफ्तारी के नाम पर सीके अनिल पर दबाव बनाया जा रहा है?MANU.MAHARAJ

सीके अनिल बिहार कर्मचारी आयोग के ओएसडी हैं. एक जमाने में काफी दबंग और कुशल आईएएस गिने जाते रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों से शंटेड पोस्ट पर हैं. पहले मीडिया को खबर पहुंचाई गयी कि उनके नाम पर अदालत से वारंट लिया जा रहा है. फिर किसी माध्यम से यह बात बताई गयी कि उनके नाम का वारंट मिल चुका है और उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है. लेकिन एसआईटी प्रमुख व पटना के एसएसपी मनु महराजा ने बयान दिया कि वारंट नहीं मिला है. लगता है कि मीडिया के एक हिस्से को कुछ और तो दूसरे को कुछ खबर दे कर भ्रम फैलाया जा रहा है.

महाराज ने खुद कहा कि यह अफवाह कैसे फैल रही है उन्हें नहीं मालूम

खबर यह भी फैलाई जा रही है कि सीके अनिल ने आयोग के अध्यक्ष सुधीर कुमार के कम्प्युटर से छेड-छाड़ किया. और उनके फिंगर प्रिंट उनके कम्प्युटर से मिले हैं. फिंगर प्रिंट कम्प्युटर से मिलना कितना बड़ा सुबूत है, यह एसआईटी को तो पता है साथ ही एक आम आदमी को भी, क्योंकि कम्प्युटर जो आफिस में होता है उसे एक से ज्यादा लोग काम करते हैं और जो भी काम करेगा उसकी उंगलियों के निशान उस पर आयेंगे.

अगर अनिल ने फैक्ट्स से छेड़-छाड़ किया है, सूचनाओं का गलत इस्तेमाल किया है तो फिर एसआईटी किस बात का इंतजार कर रही है. देर करने से और भी साक्ष्य मिटेंगे.  सीके अनिल के बारे में यह बताया जा रहा है कि वह आफिस नहीं आ रहे हैं और उन्होंने अपना मोबाइल बंद कर रखा है. मोबाइल बंद करना कौन सा अपराध है?  हां उनका आफिस ना आना तब अपराध हो सकता है जब उन्होंने बिन सूचना दिये आफिस आना बंद कर दिया है. लेकिन इस मामले में एसआईटी क्लियर क्यों नहीं कहती कि उन्होंने गैरकानूनी तरीके से आफइस आना छोड़ दिया है.

कुछ सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि एसआईटी, खुद आईएएस एसोसिएशन के दबाव में आ गयी है. आईएएस एसोसिएशन इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है और आईएएस सुधीर की गिरफ्तारी को गंभीरता से ले रहा है.

अगले कुछ दिनों में पता चलेगा कि एसआईटी के दावे कितने सच हैं. और जो अधिकारी जानबूझ कर मीडिया का इस्तेमाल अफवाह फैलाने के लिए कर रहे हैं उनकी हकीकत भी सामने आयेगी.

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