एडिटोरियल कमेंट: बहादुर यादव को सलाम जिन्होंने हजारों सैनिकों को भूखा मरने की सच्चाई उजागर कर दी

रातोंरात देश की सानुभूति बटोरने वाले बीएसएफ के जवान तेज बहादुर यादव बर्फीली तूफान में तैनात हजारों सैनिकों की आवाज बन गये हैं. उन जवानों की आवाज जो ग्यारह घंटे ड्युटी करते हैं लेकिन जिन्हें थर्ड क्लास भोजन और दाल के नाम पर हल्दी पानी के सहारे जिंदा रहना पड़ता है.

तेज बहादुर यादव

तेज बहादुर यादव

                                                     इर्शादुल हक, एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम
तेज बहादुर यादव ने जो वीडियो सोशल मीडिया पर डाला है वह इस कहानी के दर्दनाक पहलू को उजागर करता है. लेकिन अब दिक्कत यह है कि इस दुखद सच्चाई को उजागर करने वाले तेज बहादुर यादव की जान और नौकरी पर खतरा है.
तेज बहादूर कहते हैं कि देशवासियों मैं आपसे एक अनुरोध करना चाहता हूं. हम लोग सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक, लगातार 11 घंटे इस बर्फ में खड़े होकर ड्यूटी करते हैं. चाहे जितनी भी बर्फ हो, बारिश हो, तूफान हो, इन्‍हीं हालात में हम ड्यूटी कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर अपने दर्दनाक हालात को डालते हुए तेज बहादुर ने अपील की है कि उसके दर्द को देश समझे.  वह कहते है, ‘हम किसी सरकार के खिलाफ आरोप नहीं लगाना चाहते. क्‍योंकि सरकार हर चीज, हर सामान हमको देती है. मगर उच्‍च अधिकारी सब बेचकर खा जाते हैं, हमारे को कुछ नहीं मिलता. कई बार तो जवानों को भूखे पेट सोना पड़ता है.’
हालांकि बीएसएफ के आला अफसरों का कहना है  कि बीएसएफ अपने जवानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्पर रहता है.अगर किसी एक शख्स को कोई परेशानी हुई है तो इसकी जांच होगी.
तेज बहादुर ने एक ऐसे साहस का काम किया है जिसकी मिसाल कम मिलती है. क्योंकि ़डिसिप्लीन के नाम पर फौजी को ऐसा करने से रोका जाता है और अगर किसी ने कुछ ऐसा किया तो उसे नौकरी से हटाने के साथ कोर्ट मार्शल भी किया जा सकता है.
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सरकार उच्च गुणवत्ता के भोजन और दीगर संसाधन अपने जवानों को मुहैया कराती है इसके बावजूद अगर कुछ अधिकारी इन जवानों के हिस्से की दाल और सब्जियां तक बाजार में बेंच देते हैं तो उन्हें किसी हाल में नहीं बख्शा जाना चाहिए.
योग्य और ऊर्जावान जवानों की कमी से जूझ रही भारतीय सेना में वैसे ही युवा जाने से कतराते हैं लेकिन जिस तरह से तेज बहादुर ने बहादुरी के साथ सेना के अंदर फैले भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है उससे सेना के प्रति युवाओं का आकर्षण और विश्वास भी कम हुआ है.

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