‘कथित सेक्युलर दलों की गुलामी से बाहर निकलें मुसलमान वरना अब जूते की ठोकरें ही मिलना बाकी हैं

जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय कंवेनर अशफाक रहमान ने कहा है कि राजनीतिक ना समझी के कारण मुसलमानों का वोट महत्वहीन हो जाता है. अशफाक रहमान ने कहा कि स्वघोषित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां मुसलमानों को डरा कर उनके वोटों पर कब्जा करती हैं. मगर जैसे ही ये पार्टियां सत्ता में आती हैं तो उनका  रंग-ढंग बदल जाता है.

अशफाक रहमान जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय संयोजक हैं

 

जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय कंवेनर अशफाक रहमान ने कहा है कि राजनीतिक ना समझी के कारण मुसलमानों का वोट महत्वहीन हो जाता है. अशफाक रहमान ने कहा कि स्वघोषित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां मुसलमानों को डरा कर उनके वोटों पर कब्जा करती हैं. मगर जैसे ही ये पार्टियां सत्ता में आती हैं तो उनका  रंग-ढंग बदल जाता है.

अशफाक रहमान ने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में हुए मध्यप्रदेश के चुनाव में मुसलमान कांग्रेस की जीत के लिए सबकुछ दाव पर लगा दिया लेकिन जैसे ही कांग्रेस सत्ता में आई उसने अपना असली रंग दिखा दिया. गौकुशी के नाम पर उसने तीन मुसलमानों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका लगा दिया. गोकुशी के नाम पर वहां भाजपा मॉब लिंचिंग कर रही थी और अब कांग्रेसी मुख्यमंत्री कमल नाथ उसी रास्ते पर चल पड़े हैं.

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अब जूते की ठोकर खाने की बारी

अशफाक रहमान ने याद दिलाया कि कांग्रेस जब भी सत्ता में आती है वह मुसलानों को काले कानून के शिकंजे में फंसाने लगती है. उन्होंने कहा कि आज भी हजारों मुसलमान कांग्रेस के सत्ता काल से जेलों में अलग-अलग झूठे आरोपों में जेलों में जीवन बिता रहा हैं.

मुख्य बातें

  • 22 प्रतिशत मुस्लिम वोट बड़ी ताकत है

  • कांग्रेस ने हजारों मुसलमानों को काले कानून का शिकार बनाया

  • मध्यप्रदेश में सत्ता में आते ही कांग्रेन ने अपना रंग दिखा दिया

अशफाक रहमान ने आगे कहा कि कांग्रेस के इस जालिम रवैये के बावजूद वे कुछ सूझ-बूझ से काम नहीं लेते और बेइज्जत होते रहते हैं. उन्होंने मुसलमानों को हिदायत देते हुए कहा कि अगर गुलामी की यही मानसिकता बनी रही तो अब जूते खाने के दिन आने वाले हैं. अशफाक रहमान ने कहा कि मुसलमान अपने वोट की ताकत नहीं समझते और वे इन झूठे धर्मनिरपेक्ष दलों में खुद को समाहित कर लेते हैं. इससे उनका सियासी वजूद ही खत्म होता जा रहा है.

ये है मुस्लिम वोट की ताकत

अशफाक रहमान वोटों की ताकत को समझाते हुए कहते हैं कि भारत के चुनावों में 55-60 प्रतिशत वोट डाले जाते हैं. इनमें 31-32 प्रतिशत वोट भाजपा के पाले में जाता है. इन तमाम वोटों में मुसलमानों का वोट 22 प्रतिशत होता है जिन पर तमाम कथित सेक्युलर पार्टियां दावा करके सरकार बनाने की बात करती हैं. रहमान ने कहा कि मुसलमानों का वोट मोतीचुर की तरह है जिन पर दो दर्जन सियासी पार्टियां अपना दावा जताती हैं.

अशफाक रहमान ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि जिस समुदाय का वोट इतना महत्वपूर्ण है वह समुदाय अपने वोट की ताकत से बेखबर है. अशफाक रहमान ने सवाल उठाते हुए कहा कि जो समुदाय अपने वोट की ताकत नहीं समझता उसका भला कैसे होगा?

भाजपा राज या कांग्रेसी काला कानून

अशफाक रहमान ने मुसलमानों की स्थिति को इंगित करते हुए  कहा कि हर शाख पे उल्लू बैठा है/ अंजाम ए गुलिस्ताँ क्या होगा.

अशफाक रहमान ने मुसलमानों को झकझोड़ते हुए कहा कि अगर वे आज भी नहीं जागेंगे तो उन्हें भाजपा की हुकूमत या कांग्रेस के काले कानून से ही गुजरना होगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुसलमान अपने नेतृत्व को पहचानें  और अपनी लीडरशिप खड़ी करने के लिए अपने प्रत्याशियों को वोट करें. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से अगर हमारी जीत न भी हुई तो हम हार कर भी जीत जायेंगे और इस तरह एक दिन मुसलमानों का नेतृत्व खड़ा हो जायेगा. लेकिन यह तभी संभव है जब हम एकजुट हों.

 

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