कर्ण और कृष्‍ण की पीड़ा में अपना दर्द भूला गये अशोक चौधरी

चिडि़याखाने के पास सरदार वल्‍लभभाई पटेल की प्रतिमा के बगल से हमने पोलो रोड की ओर साइकिल मोड़ा। इस रोड पर कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता अशोक चौधरी का सरकारी बंगला है। प्रदेश अध्‍यक्ष पद से हटाए जाने के बाद उनका संवाददाता सम्‍मेलन दोपहर 11 बजे से था। हम उस रोड से करीब 12 बजे गुजर रहे थे। देखा कई ओबी वैन लगे हुए हैं। हम अपनी साइकिल खड़ा कर मुख्‍य गेट के अंदर प्रवेश करने की कोशिश करने लगे। कई चैनलों के पत्रकारों से मुलाकात हुई। सभी पीसी के बाद बाहर निकल रहे थे। हम आगे बढ़ते हुए अशोक चौधरी के आवास में प्रवेश किये। हमें बताया कि वे अंदर चले गये। हम भी लौटने लगे। इस बीच देखा, अशोक चौधरी आवास से बाहर आ रहे हैं।

वीरेंद्र यादव

हमें देखते ही उसकी शिकायत शुरू हो गयी। आपने लिख दिया है कि हम जदयू में जा रहे हैं। एमएलसी से इस्‍तीफा दे रहे हैं। फिर हमने कहा- आप जदयू में अभी नहीं जा रहे हैं। कब जाना है। फिर उनकी शिकायत शुरू – आपने लिख दिया है कि हम जदयू में जा रहे हैं। हमने कहा कि हमने लिखा कि आप जदयू में जा सकते हैं। उन्‍होंने कहा – फिर से पढि़ये। इस बातचीत में हम उनके कार्यालय कक्ष में पहुंच गये। कार्यालय में कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी हुई थी।  कार्यकर्ताओं को देखकर उनका उत्‍साह बढ़ा। उन्‍होंने अपने कार्यकर्ताओं से हामी भरवाया- प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में हमारा लाइन ठीक था न। सीपी जोशी हमारा क्‍या बिगाड़ लेंगे। जिस भवानी (पार्टी सुप्रीमो) को जोशी प्रणाम करते हैं, उसी भवानी को हम भी प्रणाम करते हैं। जोशी जहां-जहां गये, पार्टी को डूबा दिया। इसी बीच एक कार्यकर्ता ने कहा- जोशी तो पार्टी को चबा जाएंगे। बात आगे बढ़ती जा रही थी।

अशोक चौधरी ने साढ़े चार साल तक पार्टी का अध्‍यक्ष बनाए रखने के लिए राहुल गांधी के प्रति कृतज्ञता जतायी। दो बार विधायक रहे। पार्टी को चार सीट से 27 पर पहुंचा दिया। 70 वर्षों से हमारा परिवार कांग्रेस के प्रति वफादार है। वफादारी का यह कौन सा सीला है। मक्‍खी के तरह निकाल कर फेंक दिया गया। हमसे इस्‍तीफा के लिए कहा भी नहीं गया। हमें बताया भी नहीं गया। किसके कहने पर कौकब कादरी को कार्यकारी अध्‍यक्ष बना दिया गया। हमारे खिलाफ साजिश की गयी है। सीपी जोशी का एजेंडा हमारे विरोधियों को मजबूत करना था।

चौधरी ने आगे कहा- नीतीश कुमार से हमारे संबंध अच्‍छे हैं। संबंध अच्छे हैं तभी तो महागठबंधन था। राहुल गांधी ने हमें नीतीश के साथ कार में बैठाकर कहा कि जाकर मिलकर राजनीति करो। तो क्‍या हम नीतीश से झगड़ा कर लेते। पार्टी तोड़ने की अफवाह फैलायी गयी। विरोधी और कुछ मीडियावालों ने अफवाह को हवा दी। गलत खबर प्रचारित की गयी। दशहरा के बाद सोनिया गांधी से मिलेंगे। कर्यकर्ताओं के साथ मिलकर पार्टी को मजबूत करेंगे।

इस दौरान अशोक चौधरी एकदम आक्रोश में थे। उनकी भाव-भंगिमा और मुद्रा नाराजगी के साथ गुस्‍सा वाला था। इस बीच उनके वाट्सअप पर किसी ने एक लंबा मैसेज भेजा। उस मैसेज में महाभारत के कर्ण और कृष्‍ण का लंबा संवाद था। दोनों ने अपने संवाद में अपनी-अपनी पीड़ा को साझा किया था। चौधरी ने संवाद को बोल-बोल पढ़ा। जैसे-जैस संवाद समापन की ओर बढ़ रहा था, वैसे-वैसे अशोक के चेहरे का भाव हल्‍का और सामान्‍य हो रहा था। वे अपने दर्द को कर्ण और कृष्‍ण की पीड़ा के साथ आत्‍मसात कर रहे थे। संवाद समाप्‍त होते-होते उनके चेहरे से आक्रोश भी गायब होता दिख रहा था।

हम अभिवादन कर कमरे से बाहर आ रहे थे कि उन्‍होंने कहा कि ऐसी खबरों में हमारा भी पक्ष ले लिया कीजिए। ठीक वैसे ही, जैसे नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्‍तार प्रकरण में पत्रकारों से कहा था कि हम से भी पूछ लेते। लेकिन खबरों की अपनी मजबूरी होती है। कई बार संबंधित पक्ष से बात करने में खबर मर जाती है। और खबर को जीवंत बनाए रखना हर पत्रकार की मजबूरी होती है।

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