कौन किसके खिलाफ साजिश कर रहा है?

पटना नगर निगम का कानूनी विवाद शतरंज की गहरी चाल का घनचक्कर बन गया है. शतरंज की यह बिसात अदालत की चहारदीवारी के अंदर भी बिछी है और बाहर भी. pmc

नौकरशाही डेस्क

एक तरफ अदालत ने निगम आयुक्त के निलंबन से जुड़े कानूनी विवाद को लारजर बेंच के हवाले कर दिया तो दूसरी तरफ अदालत के बाहर निगम आयुक्त कुलदीप नारायण ने अपने वकीलों के पैनल से ललित किशोर को हटा दिया है. उनकी जगह नारायण ने वाईवी गिरि को विधि परामर्शी बना कर अपनी भी चाल चल दी है.

ललित किशोर को हटाने के कारणों का जिक्र करते हुए कुलदीप नारायण ने कहा है कि लिलित किशोर अन्य नगर निकायों के भी वकील हैं इसलिए उनपर काम का बोझ है इसलिए वाईवी गिरि को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है. लेकिन इस खेल के पीछे का खेल कुछ और ही है. सूत्र बताते हैं कि कुलदीन नारायण और उनके वकील के बीच पारस्परिक विश्वास की कमी हुई है. बताया तो यहां तक जा रहा है कि कुलदीप नारायण जिस तरह से अपना पक्ष अदालत में रखना चाह रहे हैं, वैसे नहीं रखा जा सका है.

 

ललित किशोर काफी समय से नगरनिगम के कानूनी मामलों पर परामर्शी की हैसियत से काम देखते रहे हैं. ललित किशोर को हटाये जाने की एक प्रमुख कारण का उल्लेख करते हुए कुलदीप नारायण ने उन्हें हटाने के आदेश में इस बात का भी उल्लेख किया है कि ललित किशोर के तालुकात उन बिल्डरों से काफी घनिष्ट हुए हैं जिन्होंने गैरकानूनी तरीके से बिल्डिंग बनायी है. नारायण ने कहा है कि  बिल्डिंग बॉयलाज के उल्लंघन मामले में एक केस निगरानी वाद संख्या 107 ए 13 का केस रद्द किया गया. कुलदीप ने इशारों-इशारों में यह आभास कराया है कि ललित किशोर ने भूस्वामियों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा कराया.

यह बात काबिले गौर है कि एक दिन पहले ही निगम आयुक्त कुलदीप नारायण ने अपने फेसबुक वॉल पर एक छोटी मगर मानीखेज टिप्पणी की . उन्होंने लिखा ता कि ‘शतरंज के खिलाड़ी… गहरी होती जा रही है साजिश’.

नारायण के ये श्बद मजाक कत्तई नहीं हैं. ऐसे में सवाल यह है कि साजिश चल रही है. और गहरी साजिश चल रही है. सब अपनी-अपनी चाल चल रहे हैं. ललित किशोर को अचानक उनके परामर्शी पद से हटा कर कुलदीप नारायण ने भी अपनी चाल चल दी है.

जिस तरह से अदालत के अंदर और अदालत के बाहर कुलदीप नारायण से जुड़ा कानूनी मामाला शतरंजी चाल में उलझता जा रहा है. और जिस तरह से शह मात का खेल चल रहा है उससे लगने लगा है कि मामले की परतें जैसे-जैसे खुलेंगी वैसे-वैसे बजबजाहट और बदबू भी सामने आती चली जायेगी.

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