झूठ का पिटारा साबित हुआ कैराना से हिंदू परिवारों के भागने का आरोप

उत्तर प्रदेश के कैराना से 346 हिंदू परिवारों के भागने संबंधी भाजपा सांसद हुक्म सिंह की बात झूठ का पिटारा साबित हो गयी है.

एनडीटीवी

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गौरतलब है कि हुक्म सिंह ने 346 लोगों की लिस्ट जारी की थी जिसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इस पर राजनीतिश शुरू कर दी है. लेकिन एनडीटीवी ने इस पर ग्राउंड पर जा कर जो जायजा लिया तो ये सारे आरोप झूठे साबित हुए हैं.

एनडीटीवी की न्यूज वेबसाइट ने लिखा है कि कैराना से बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने पलायन करने वाले 346 हिंदू लोगों की लिस्ट जारी की है। एनडीटीवी की टीम ने जब कैराना का दौरा किया तो एक अलग तस्वीर सामने आई और इस लिस्ट की जांच में 11 ऐसे नाम मिले जो 10 से 15 साल पहले ही आर्थिक और क़ारोबारी वजह से पलायन कर चुके थे। इनके पलायन का संबंध किसी आतंकी माहौल से नहीं था जिसका दावा हुकुम सिंह ने अपनी लिस्ट में किया है।

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लिस्ट में 165 और 166वें नंबर पर जय कुमार धीमान और पोनी का नाम है। उनके भाई मनु धीमान कैराना के बिसातयान मौहल्ले में कई दशकों से रहते हैं। वह हैरान है कि लिस्ट में उनके दो भाइयों के नाम हैं, उनका कहना है कि उनके दोनों भाई रोज़गार के लिए कई साल पहले ही इलाका छोड़कर चले गए थे।

अच्छे अवसर के लिये पलायन
सी लिस्ट में सीताराम लुहार के परिवार का ज़िक्र है। उनके तीन बेटे नरेंद्र, सुरेंद्र और गोटी का 153 से 155 नंबर पर नाम है। कभी कैराना के बिसातयान मौहल्ले में यह परिवार रहता था लेकिन 10 साल पहले ही अपना घर-बार बेचकर जा चुका है। जब एनडीटीवी की टीम इस पते पर पहुंची तब सामने आया कि इस मक़ान में कांग्रेस के स्थानीय नेता मोहम्मद आलम चौधरी रहते हैं। आलम चौधरी ने एनडीटीवी को बताया कि सीताराम लुहार ने 10 साल पहले उन्हें यह घर बेचा था और आर्थिक वजहों से परिवार पानीपत चला गया था।
हुकुम सिंह द्वारा जारी की गई लिस्ट में मांगे राम के तीन बेटे सुनील प्रजापत, सतीश प्रजापत और सोनू प्रजापत का नाम 159 से 161 नंबर तक है। जब एनडीटीवी इस पते पर पहुंची तो उनके भतीजे शिवकुमार प्रजापत मिले जिन्होंने बताया कि मांगे राम अपने परिवार के साथ क़रीब 15 साल पहले ही कैराना छोड़कर रोज़गार की तलाश में चले गए थे।

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