पीसीआई रिपोर्ट: ‘जागरण’ भी है विज्ञापन लूट का गुनाहगार

पिछले दिन हमने ‘हिंदूस्तान’ द्वारा 200 करोड़ के विज्ञापन लूट की रिपोर्ट छापी थी.आज पढ़ें बिहार का दूसरा सबसे बड़ा अखबार ‘दैनिक जागरण’ भी विज्ञापन लूट में पीछे नहीं है.

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के जांच दल के खुलासे का एक अंश-

रजिस्ट्रार ऑफ न्यूज पेपर ऑफ इंडिया, नयी दिल्ली ने दैनिक जागरण को पटना से प्रकाशन की अनुमित दे रखी है. लेकिन दैनिक जागरण का मुद्रण और प्रकाशन और सर्कुलेशन भागलपुर,मुंगेर, लखीसराय जमुई, शेखपुरा, खगरिया, बेगूसराय और अन्य जिलों के संस्करण से एक ही रजिस्ट्रेशन नम्बर से नम्बर से सालों तक काम करता रहा और सरकार के विज्ञापन लेता रहा.

पीसीआई रिपोर्ट: हिंदुस्तान ने किया 200 करोड़ का घोटाला

फिलहाल यह अखबार आरएनआई नम्बर की जगह “अप्लायड फॉर” यनी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन जमा किया गया है) लिखता है. इसके बावजूद यह अखबार केंद्र और राज्य सरकार से नियमित रूप से विज्ञापन लेता रहता है.
यह राजकोष की लूट की संस्कृति का जीवंत उदाहरण है.

अनेक अंग्रेजी और उर्दू अखबारों ने कोलकाता से मुद्रण करके पटना से प्रकाशन की अनुमति ले रखी है जबकि ये अखबार पटना से भी अपने संस्करण का मुद्रण कराते हैं और इन्हें राज्य भर में वितरण करवाते हैं. ये उर्दू और अंग्रेजी अखबार गैरकानूनी तरीके सरकारी विज्ञापन प्राप्त करते हैं. यह सारा खेल केंद्र और राज्य सरकार का विज्ञापन लेने के लिए किया जाता है.

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