बालूमाथ दादरी नहीं लेकिन उससे कम भी नहीं

 

गांव-झाबर। प्रखंड-बालूमाथ। गांव-नवादा और आराहरा। प्रखंड- हेरंज। इन गांवों की पुरानी पहचान रही होगी। लेकिन, अब इनकी नयी पहचान है।

photo Dainikbhaskar.com

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लोग सदियों तक झाबर को इसलिए याद रखेंगे क्योंकि यहां कुछ लोगों ने सामूहिक तौर पर एक बच्चे समेत दो लोगों की हत्या कर दी। उनकी लाशों को फांसी के फंदे से लटका दिया। सार्वजनिक जगह पर। ताकि मैसेज जाए कि ये लोग हैवानियत पर उतर सकते हैं। लोग डरें। यह डर पैदा करने की खूनी साजिश थी।

नवादा और आराहरा गांवों को इसलिए याद रखेंगे कि यहां के मजलूम अंसारी और इम्तेयाज की नृशंस हत्या कर दी गयी। खैर, हम तो देखने गए थे। बालूमाथ दादरी नहीं लेकिन उससे कम भी नहीं।

पत्रकार  रवि प्रकाश की फेसबुक वॉल से

नोट- झाबर गांव में तीन मुस्लिम भैंस व्यापारियों को हिंदू मंच के कार्यकर्ताओं ने हत्या करके उनकी लाशों को पेड़ पर लटका दिया था. पुलिस के अनुसार इससे पहले उन्होंने उनका अपहरण किया था.

 

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