बिहार में निजी संस्थान हिंदी को करेंगे प्रोत्साहित तो टैक्स में मिलेगी छूट

– शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने की घोषणा, साहित्यकारों को मिला पुरस्कार
नौकरशाही डेस्क, पटना

शिक्षा मंत्री डॉ अशोक चौधरी ने निजी संस्थानों से हिंदी को प्रोत्साहित करने की अपील की है

शिक्षा मंत्री डॉ अशोक चौधरी ने निजी संस्थानों से हिंदी को प्रोत्साहित करने की अपील की है

बिहार में निजी संस्थान हिंदी को करेंगे प्रोत्साहित तो टैक्स में मिलेगी छूट. घोषणा शिक्षा मंत्री डॉ अशोक चौधरी ने की है. हिंदी सेवी सम्मान व पुरस्कार समारोह में उन्होंने कहा कि राज्य व केंद्र के विभागों में हिंदी में काम हो रहा है. अब समय आ गया है कि निजी संस्थान, कार्यालय व क्षेत्र में भी हिंदी को प्रोत्साहन दिया जाये. जो संस्थान ऐसा करेंगे, उन्हें टैक्स में छूट दी जायेगी. टैक्स में छूट देने को लेकर अंतिम निर्णय सरकार कर सकती है. उन्होंने हिंदी निदेशालय को अपना एप तैयार करने की भी सलाह दी. एप में हिंदी व साहित्य के शब्दों रखा जाये, ताकि युवा उसे जान सकें. देश की आधी से ज्यादा आबादी हिंदी बोलती और समझती है, लेकिन उस आधार पर इसे बढ़ावा नहीं मिलता. हाइयर एजुकेशन में अंगरेजी महत्वपूर्ण हो जाता है. चीन ने विकास किया है, लेकिन सब कुछ वहां की भाषा में ही किया है, न कि दूसरी कोई भाषा में. शिक्षा मंत्री ने कहा आज हिंदी साहित्य के प्रति लोगों की सोच में कमी आयी है. जब तक हिंदी की प्रासंगिकता नहीं रहेगी, तब तक साहित्यकारों का प्रयास सही दिशा में नहीं जा सकता है. हिंदी साहित्य में जो बच्चे रुचि लेते हैं, उन्हें भी प्रोत्साहित किया जाये. शिक्षा मंत्री ने साहित्यकार सम्मान में हॉल के भी नहीं भरे जाने पर सवाल उठाये और कहा कि साहित्य के प्रति लोगों में उदासीनता है. इसे प्रमोट करने की आवश्यकता है. राजभाषा पुरस्कार जो बंद हो गया था, उसे फिर से शुरू किया गया है, क्योंकि सरकार हिंदी का विकास चाहती है. पुरस्कार रूपी यह धागा जो टूट गया था, उसे सरकार फिर से पिरोने की कोशिश कर रही है.
हिंदी साहित्यकारों को मिला सम्मान
शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने हिंदी साहित्यकारों को हिंदी सेवी सम्मान व पुरस्कार से सम्मानित किया. साहित्यकारों को 2014-15 और 2016-17 के लिए यह सम्मान मिला. साहित्यकारों के नामों की घोषणा पहले ही हो चुकी थी. प्रो. रामनिंजन परिमलेंदू को 2014-15 के लिए और डॉ खगेंद्र ठाकुर को 2016-17 के लिए डॉ राजेंद्र प्रसाद शिखर सम्मान दिया गया. इन्हें सम्मान के रूप में राज्य सरकार ने तीन लाख की पुरस्कार राशि दी. वहीं, स्व. प्रो. तुलसी राम के परिजन को बाबा साहेब भीमराव अम्बेदकर पुरस्कार के रूप में 2.50 लाख का चेक दिया गया है. इसके अलावा जननायक प्रो. सुरेंद्र स्निग्ध को 2014-15 के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर पुरस्कार, आलोक धन्वा का नागार्जुन पुरस्कार दिया गया.

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