किसी ने ‘मुस्लिम’ कहके छला तो कोई ‘मोमिन’ बना के हक मार गया

बिहार में मुस्लिम राजनीति किस दिशा में जा रही हैं। उसके समक्ष कौन सी चुनौती है और इसकी जमीन क्‍या है। मुसलामानों की जाति, जमात और जमीन को लेकर आज गंभीर मंथन हुआ और कई नये पहलुओं पर बहस की शुरुआत भी की गयी।jrs

नौकरशाही ब्‍यूरो

जगजीवनराम संसदीय अध्‍ययन और शोध संस्‍थान पटना के तत्‍वावधान में आयोजित संगोष्‍ठी – बिहार में मुस्लिम राजनीति- ने मुसलमानों के मुद्दों पर नयी बहस शुरुआत की और चुनौतियों से मुकाबले के लिए पहल भी की गयी।

 

इस अवसर पर गांधी संग्रहालय के मंत्री व गांधीवादी रजी अहमद ने कहा कि देश के विभाजन का जिम्‍मेवार सिर्फ मुसलमानों को बता दिया जाता है। लेकिन इसके लिए जितना जिन्‍ना जिम्‍मेवार थे, उतना ही नेहरू, पटेल, राजेंद्र प्रसाद और अंबेदकर भी थे। उन्‍होंने कहा कि आज मुसलमानों की तीसरी पीढ़ी को भी विभाजन का जिम्‍मेवार माना जा रहा है।

कार्यक्रम का विषय प्रवेश संस्‍थान के निदेशक श्रीकांत ने किया और साथ ही वक्‍ताओं का परिचय भी कराया। बहस की शुरुआत करते हुए नौकरशाहीडॉटइन के संपादक और सामाजिक कार्यकर्ता इर्शादुल हक ने कहा कि मुसलमानों के सरोकारों को लेकर मुस्लिम नेता भी ईमानदार नहीं हैं।  उन्हों ने आजादी के पहले और बाद के दो संगठनों मुस्लिम लीग और मोमिन कांफ्रेंस का जिक्र किया. बताया कि कैसे लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने अलग राष्ट्र बना कर मुसलमानों को बांट के कमजोर किया. इसी तरह उसी दौर में मोमिन कांफ्रेंस ने पिछड़े मुसलमानों की नुमाइंदगी के लिए मोमिन शब्द का इस्तेमाल किया और सत्ता के करीब पहुंच गये. लेकिन मोमिनों के नाम पर एक खास समाज का भला किया गया जबकि बाकी पिछड़ी बिरादरियों को इस नाम पर छला गया.उन्‍होंने मुस्लिम राजनीति के नाम पर अपनी भलाई सोची और समाज को हासिए पर छोड़ दिया। इसका खामियाजा समाज को भुगतना पड़ रहा है।

पसमांदा राजनीति में अपनी विशेष पहचान रखने वाले सांसद अली अनवर ने कहा कि समाज में जातीय भेदभाव है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है। हमारे मुद्दे भी अलग हैं। उन्‍होंने यह भी माना कि मुस्लिम समाज आज राजनीति की मुख्‍यधारा से जुड़ कर अपनी ताकत बना व बता सकते हैं। अलीगढ़ विश्‍वविद्यालय में प्रोफेसर मोहम्‍मद सज्‍जाद ने बड़ी तल्‍खी के साथ कहा कि मुसलमानों में भी भेदभाव और सामाजिक विभाजन है। हमें इस पर बहस करनी ही होगी। इससे हम भाग नहीं सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि सांप्रदायिकता का जवाब सांप्रदायिकता से नहीं दिया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता समाजशास्‍त्री एमएन कर्ण किया। इस मौके पर बड़ी संख्‍या में गणमान्‍य लोग मौजूद थे।

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