ये हैं ‘लालू भक्‍त’ विनय बिहारी

श्रद्धा और विश्‍वास की कोई सीमा नहीं होती है। किसी व्‍यक्ति के प्रति आस्‍था ही व्‍यक्ति को भक्‍त और पूजारी बना देता है। आस्‍था पैदा होने की सबके के लिए अपनी-अपनी वजह हो सकती है। लेकिन इसके केंद्र में होता है भरोसा।lll

नौकरशाही ब्‍यूरो

 

इसी भरोसे के साथ अपने दायित्‍वों को निर्वाह कर रहे हैं विनय बिहारी। पटना के निवासी हैं और पेड़ा का कारोबार करते हैं। उनके ‘भगवान’ हैं राजद प्रमुख लालू यादव। वे हर महीने में एक-दो बार ‘लालू दर्शन’ के लिए 10 सकुर्लर रोड आते हैं। अपने साथ एक पौवा पेड़ा भी लाते हैं प्रसाद के रूप में। वे ‘लालू दर्शन’ के बाद पेड़ा को प्रसाद के रूप में आवास के अंदर और बाहर उपस्थित लोगों के बीच बांट देते हैं। यदि लालू यादव से भेंट नहीं हुई तो पेड़ा वापस लेकर चले जाते हैं।

 

विनय बिहारी कहते हैं कि वे पिछले एक साल से 10 नंबर आवास पर आ रहे हैं और लालू दर्शन के बाद प्रसाद का वितरण करते आ रहे हैं। पहले राजद कार्यालय में ही प्रसाद का वितरण करते थे। वे कहते हैं कि पेड़ा बाढ़ से मंगवाते हैं। वे ग्राहकों की मांग पर पटना में पेड़े की आपूर्ति भी करते हैं। पेड़ा कई किस्‍मों की होती है। शुद्ध पेड़ा तीन सौ रुपये प्रति किलो मिल जाता है, जबकि चीनी की अधिक मात्रा वाला पेड़ा सवा दो सौ रुपये किलो भी मिल जाता है। प्रसाद के लिए उपलब्‍धता के आधार पर दोनों किस्‍म का पेड़ा लेकर आते हैं। विनय बिहारी गायक भी हैं और श्रोताओं की मांग पर गाकर सुनाते भी हैं। जबरदस्‍ती भी सुनाने से परहेज नहीं करते हैं। पॉकेट में कुछ गानों को रखते हैं। 10 नंबर के बाहर इंतजार के दौरान उनसे मुलाकात हुई और उन्‍होंने ‘लालूमय’ एक गाना भी सुना दिया। उनसे आमतौर पर राजद कार्यालय में मुलाकात हो सकती है।

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