राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा – जम्मू-कश्मीर के लिए अलग संविधान है गलत

देश के पहले उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल पर लिखी एक किताब के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लिए संविधान में एक अलग संविधान का ज़िक्र नहीं होना चाहिए.किसी राज्य के लिए एक अलग संविधान का होना देश की संप्रभुता से समझौता करने जैसा हैं.

नौकरशाही डेस्‍क

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के विवादित अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. ऐसे मौके पर अजीत डोभाल की यह टिप्पणी आई है. अनुच्छेद 35-ए के तहत जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को खास तरह के अधिकार और कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं. जिसको लेकर वहां अस्थायी तौर पर रह रहे लोगों में असंतोष है. उन्‍होंने कहा कि हमें देश की संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए.

डोभाल ने कहा कि संप्रभुता को न तो कमजोर किया जा सकता है और न ही गलत तरीके से परिभाषित किया जा सकता है. जब अंग्रेज भारत छोड़कर गए तो संभवत: वे भारत को एक मजबूत संप्रभु देश के रूप में छोड़कर नहीं जाना चाहते थे. पटेल समझ गए थे कि अंग्रेज भारत को सम्पूर्ण संप्रभुता छोड़कर नहीं जाना चाहते है इसीलिए देश को आन्तिरक तौर पर तोड़ कर जाने की योजना बना रहे थे. सरदार पटेल देश की मजबूत आधारशिला रखने में अहम योगदान है.

अनुच्छेद 35-ए  की कहानी

1947 में हुए बंटवारे के दौरान लाखों लोग शरणार्थी बनकर भारत आए थे. देश भर के जिन भी राज्यों में ये लोग बसे, आज वहीं के स्थायी निवासी कहलाने लगे हैं. लेकिन जम्मू-कश्मीर में स्थिति ऐसी नहीं है. यहां आज भी कई दशक पहले बसे लोगों की चौथी-पांचवी पीढ़ी शरणार्थी ही कहलाती है और तमाम मौलिक अधिकारों से वंचित है.

एक आंकड़े के अनुसार, 1947 में 5764 परिवार पश्चिमी पकिस्तान से आकर जम्मू में बसे थे. इन हिंदू परिवारों में लगभग 80 प्रतिशत दलित थे. अनुच्छेद 35 ए आज से 64 साल पहले कश्मीर के लिए लाया गया था. तब कश्मीर को देश के दूसरे राज्यों से अलग विशेष अधिकार दिए गए थे. लेकिन 64 सालों में इस पर लगातार सवाल भी उठते रहे हैं कि कश्मीर के लिए अलग कानून क्यों है और क्या ऐसे ही कानून अलगाववाद की जड़ है?

क्‍या है अनुच्छेद 35-ए  

अनुच्छेद 35A से जम्मू कश्मीर को ये अधिकार मिला है कि वो किसे अपना स्थाई निवासी माने और किसे नहीं. जम्मू कश्मीर सरकार उन लोगों को स्थाई निवासी मानती है जो 14 मई 1954 के पहले कश्मीर में बसे थे. ऐसे स्थाई निवासियों को जमीन खरीदने, रोजगार पाने और सरकारी योजनाओं में विशेष अधिकार मिले हैं. देश के किसी दूसरे राज्य का निवासी जम्मू-कश्मीर में जाकर स्थाई निवासी के तौर पर नहीं बस सकता. दूसरे राज्यों के निवासी ना कश्मीर में जमीन खरीद सकते हैं, ना राज्य सरकार उन्हें नौकरी दे सकती है. अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उसके अधिकार छीन लिए जाते हैं.

 

 

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