लालू के विधायक के ठिकानों पर छापेमारी के लिए 14 महीने बाद क्यों खुली IT की नींद, ये 4 कारण जरूर जान लें

लालू के विधायक के ठिकानों पर छापेमारी के लिए 14 महीने बाद क्यों खुली IT की नींद, ये रहे 4 कारण

Abu dojana

अबु दोजाना सुरसंड से आरजेडी विधायक हैं

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इर्शादुल हक, एडिटर, नौकरशाही डॉट कॉम
 ये छापेमारी राजद विधायक अबू दोजाना के ठिकानों पर हुई है. अबु दोजाना वही विधायक हैं जिनकी मैरिडियन कंस्ट्रक्शन्स लाल प्रसाद के परिवार के लिए पटना में मॉल बना रही थी. जिसे ईडी ने जब्त कर रखा है और उसका काम महीनों से रुका पड़ा है. याद रखने की बात है कि  बुधवार को अबू दोज़ना के कई ठिकानों पर छापेमारी की गई. गौरतलब है कि राजद विधायक अबु दोजाना के तफ्तरों पर यह छापेमारी, राबड़ी देवी और मीसा भारती के घरों पर सीबीआई व ईडी की छापेमारी के 14 महीने बाद की गयी है.कथित तौर पर जिस आईआरसीटीसी होटल आवंटन घोटाले के बदले लालू परिवार को कथित तौर पर जमीन मिली थी उस पर दोजाना की कम्पनी ही माल बना रही थी.  ऐसे में आयकर विभाग की इस कार्रवाई पर सवाल उठने के कुछ महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो रहे हैं. 
यहां ध्यान रखने की बात है कि आईटी, ईडी और सीबीआई ये तमाम एजेंसियां केंद्र सरकार के अधीन आती हैं. इन तीनों एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र भले ही अलग अलग हैं पर इन एजेंसियों के दुरोपयोग के आरोप अकसर लगते रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने तो सीबीआई को केंद्र सरकार का तोता तक कह चुका है.

एक–  चौदह महीने बाद क्यों हुई चापेमारी?

जब  ईडी और सीबीआई ने  राबड़ी देवी और तेजस्वी के घर पर छापेमारी की थी उसी समय अबुदोजाना को यह आभास हो चुका था कि कभी भी अगली बारी उनकी आ सकती है. लेकिन उनके ठिकानों पर 14 महीने बाद इंकम टैक्स ने छापे मारी क्योंकि?

दो- अबु दोजाना ने बचाव के उपाय पहले से कर रखे थे

इन 14 महीनों का मतलब यह हुआ कि अबु दोजाना को पूरा  एक वित्त वर्ष  मिला जिस दौरान उन्होंने अपने कागजात को पूरी तरह से चौकस और चुस्त बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी होगी. ऐसे में 14 महीने इंकम टैक्स का महकमा क्यों सोया रहा?

तीन– बिहार में हत्याओं से ध्यान बटाने की कोशिश तो नहीं ?

किसी फर्म या कम्पनी के आय के स्रोतों पर संदेह होने की स्थिति में या यह आभास होने पर कि वह फर्म इंकम टैक्स की फाइलिंग में ईमानदारी नहीं बरत रहा तो यह एक सधारण प्रक्रिया है जिसके तहत इंकम टैक्स उस फर्म के कागजात की छानबीन करता है. लेकिन पिछले चौदह महीने में अबु दोजाना की कम्पनी पूरी तरह चौकन्ना हो चुकी थी कि जब उनकी पाटर्टी के सबसे शक्तिशाली नेता के घर पर छापेमारी हो सकती है तो उनको कैसे बख्शा जा सकता है. ऐसे में छापेमारी तो होनी ही थी लेकिन छापे मारी के लिए आज का दिन क्यों चुना गया?
यहां ध्यान रखने की बात है कि यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब बिहार की भाजपा-जदयू की सरकार लगातार एके47 की गड़गड़ाहट और हत्या के कारण  कटघरे में खड़ी है. मीडिया लगातार इन हत्याओं, हिंसा, लिंचिंग और रेप जैसी घटनाओं पर नीतीश-सुशील मोदी की सरकार पर हमलों की बौछार कर रहा है. इन हत्याओं से सुशील मोदी इतने आहत हुए कि पिछले दिनों उन्होंने गिड़गिड़ाते हुए अपराधियों से हाथ जोड़ कर अपील की थी कि वह पितृपक्ष के मौसम में तो कम से कम हिंसा ना करें. मोदी का इतना कहना था कि लालू व तेजस्वी ने एक साथ हमला करते हुए मोदी को नसीहत दे डाली कि सत्ता इकबाल से और हनक से चलता है, गिड़गिड़ाने से नहीं. इस बयान के दूसरे दिन ही यह छापेमारी हो गयी.

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चार- क्या अबू दोजाना परेशानी में फंसेंगे?

इंकम टैक्स की इस कार्रवाई को भले ही छापेमारी कहा जाता हो पर दर असल यह कागजात की जांच है.  आय दिन ऐसी कार्वाई किसी न किसी फर्म या कम्पनी पर होती है. ऐसे मामलों में संबंधित फर्म को अपने कागजात पेश करने होते हैं. यह साबित करना होता है कि इंकम टैक्स फाइलिंग कम्पनी ने उचित तरीके से किया है या नहीं. इस बीच यह संभव हो सकता है कि आईटी, सबंधित कम्पनी के अकाउंट को फ्रीज कर ले. लेकिन उस कार्रवाई से कम्पनी के कामकाज पर बहुत प्रभाव नहीं पड़ता. जहां तक अबु दोजाना की कम्पनी का मामला है तो यह साफ है कि उसने पिछले 14 महीने में अपनी समझ से तमाम कागजात को पुख्ता कर रखा है.
 

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