सामान्‍य प्रशासन विभाग ‘निगल’ गया था अधिसूचना, दोषी कौन?

जबरन सेवानिवृत्ति के बाद भी किसी अधिकारी को डीएम का प्रभार सौंपना सुशासन के दावे को तार-तार कर देता है। लेकिन यह संभव हो सका है बिहार के वैशाली जिले में, जहां जबरन रिटायर्ड  बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रमेश मिश्रा को वैशाली का प्रभारी डीएम बना दिया गया। वजह यह थी कि सामान्‍य प्रशासन विभाग ने 14 जुलाई को रमेश मिश्रा के अनियमितता के आरोप में जबरन सेवानिवृत्ति की अधिसूचना को ऑन लाइन नहीं किया था। इस बीच सामान्‍य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव डीएस गंगवार ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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बिहार ब्‍यूरो

सामान्‍य प्रशासन विभाग की ओर से 11 से 14 जुलाई के बीच कोई भी अधिसूचना सार्वजनिक नहीं की गयी थी, जबकि आम तौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा और बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के तबादले और पदस्‍थापन की अधिसूचना ऑनलाइन कर दी जाती है और सामान्‍य प्रशासन विभाग की साइट पर उपलब्‍ध रहती है। इस बीच फजीहत झेलने के बाद 31 जुलाई को सामान्‍य प्रशासनिक विभाग ने अधिसूचना जारी करते हुए डॉ उमाशंकर मंडल को प्रोन्‍नतति देते हुए अपर समाहर्त्‍ता (संयुक्‍त सचिव स्‍तर में उत्‍क्रमित) वैशाली के पद पर पदस्‍थापित किया और वैशाली के डीएम का प्रभार सौंपा। उल्‍लेखनीय है कि वैशाली के जिलाधिकारी विनोद सिंह गंजियाल 21 जुलाई से 5 अगस्‍त, 14 तक अवकाश पर हैं। 21 जुलाई को रमेश मिश्रा को प्रभार सौंपा था। 31 जुलाई को डॉ मंडल को शेष अवधि के लिए डीएम का प्रभार सौंपा गया है। डॉ मंडल वैशाली में ही डीडीसी थे। कल प्रभारी डीएम रमेश मिश्र ने अपना त्यागपत्र दे दिया है।

 

जानकारी के अनुसार, किशनगंज में चाय बागानों के लिए अवैध रूप से सरकारी जमीन की बंदोबस्ती मामले में जबरन सेवानिवृत्त किए गए वैशाली के एडीएम रमेश मिश्र 9 दिनों तक डीएम के प्रभार में रहे। 14 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग ने मिश्र के जबरन रिटायरमेंट का आदेश निकाला। सात दिनों बाद 21 जुलाई को एडीएम रमेश मिश्र को वैशाली डीएम का प्रभार सौंप दिया गया। इस बीच 16 जुलाई को मिश्र आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट गए। सरकार ने 28 को काउंटर एफिडेविट लगाया। जाहिर है हाईकोर्ट में मिश्र ने आदेश की कॉपी लगाई होगी, लेकिन अब कह रहे हैं कि उन्हें 30 जुलाई को आदेश मिला।

 

रमेश मिश्र पर औद्योगिक इकाइयों के लिए आवंटित की जाने वाली 182 एकड़ सरकारी जमीन को चाय बागान के लिए 44 लोगों को बंदोबस्त करने का आरोप है। मामला वर्ष 1995 का है, तब वे किशनगंज में भूमि सुधार उपसमाहर्ता के पद पर कार्यरत थे। सामान्य प्रशासन विभाग ने मिश्र के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया। संचालन पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन और एडीएम के स्पष्टीकरण पर विचार के बाद उन्हें दोषी पाया गया। इस मामले में दो डीएम सहित 18 पदाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ निगरानी ने मामला दर्ज किया था। इसके बाद रमेश मिश्र के जबरन रिटायरमेंट का आदेश 14 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी किया गया था, लेकिन इस अधिसूचना को उस दिन ऑन लाइन नहीं किया गया था। और संभवत: इसकी सूचना भी संबंधित अधिकारियों को नहीं दी गयी थी।

 

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