होते होते रही गयी पत्रकार राजदेव नंदन जैसी एक और वारदात

सीवान के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या की गुंज अभी समाप्त भी नहीं हुई की राजधानी पटना में शुक्रवार की देर रात राजदेव रंजन कांड की पुनरावृति होते-होते बची।

टोलिग्राफ के प्रोडॉक्शन मैनेजर राजेश कुमार

टोलिग्राफ के प्रोडॉक्शन मैनेजर राजेश कुमार

विनायक विजेता

नई स्कार्पियों पर सवार चार युवा अपराधियों ने पटना से प्रकाशित अंगे्रजी दैनिक ‘टेलीग्राफ’ के कर्मी राजेश कुमार सिंह को घंटो बंधक बनाये रखा.
पत्रकार को उनकी गाड़ी से उतारकर अगवा किया और फिर उन्हें अपनी नई स्कार्पिर्यो पर बिठाकर पूरे पटना में घुमाते हुए गाड़ी में ही उनकी जबर्दस्त पिटाई की जिससे वो लहूलूहान हो गए। स्कार्पियों में शराब के नशे में धूत्त बैठे चार अपराधियों ने राजेश सिंह का एटीएम कार्ड लेकर उससे रुपये भी निकाल लिए।

बाद में बुद्ध मार्ग में गाड़ी बंद होने के कारण अपराधी जख्मी हालत में गाड़ी में पड़े राजेश सिंह सहित अपनी स्कार्पियों छोड़कर भाग निकले।

तो ऐसे बची जान

जख्मी हालत में राजेश कोतवाली थाना पहुंचकर अज्ञात अपराधियों पर मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने अपराधियों की स्कार्पियो जप्त कर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। बताया जाता है कि प्रोडक्शन मैनेजर राजेश अपने कुछ सहयोगियों के साथ हिन्दुस्तान अखबार के शिवाला स्थित प्रिटिंग प्रेस जहां उनका अखबार ‘टेलीग्राफ’ छपता है, से रात में अखबार की छपाई कराकर पटना लौट रहे थे।

बेली रोड में लगे भयंकर जाम में उनके कार्यालय की गाड़ी आगे निकलने के क्रम में राजाबाजार से शगुना मोड़ की तरफ जा रही एक स्कार्पियो में टच कर गई जिसके बाद स्कार्पियों में बैठे चार युवक गुससे में बाहर निकले। पहले उनहोंने अन्य कर्मियों से मारपीट और गालीगलौज की। राजेश द्वारा इसका विरोध करने पर उन अपराधियों ने राजेश को उनकी गाड़ी से खींचकर अपनी स्कार्पियों में बैठा लिया और उन्हें गाड़ी में ही मारते पिटते ले गए। अपराधी उन्हें गाड़ी में ही मारते पीटते घंटो पटना की सड़कों पर घुमाते रहे पर कहीं भी उनका पुलिस से वास्ता नहीं पड़ा जो राजधानी में पुलिसिया चौकसी का पोल खोलने के लिए काफी है।

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