‘फासिस्ट’ Amit Shah के शांति निकेतन प्रवेश के विरोध की तैयारी

‘फासिस्ट’ Amit Shah के शांति निकेतन प्रवेश के विरोध की तैयारी

शांति निकेतन ( Shanti Niketan) के छात्रों ने कुलपति से कहा है कि वह (Amit Shah)अमित शाह को रवींद्र नाथ टैगोर द्वार स्थापित विश्रविद्यालय परिसर में घुसने ना दें क्योंकि टैगोर फासिस्ट ताकतों के खिलाफ थे.

शांति निकेतन ( Shanti Niketan) के छात्रों ने कुलपति से कहा है कि वह (Amit Shah)अमित शाह को रवींद्र नाथ टैगोर द्वार स्थापित विश्रविद्यालय परिसर में घुसने ना दें क्योंकि टैगोर फासिस्ट ताकतों के खिलाफ थे.
शांति निकेतन ( Shanti Niketan) के छात्रों ने कुलपति से कहा है कि वह (Amit Shah)अमित शाह को रवींद्र नाथ टैगोर द्वार स्थापित विश्रविद्यालय परिसर में घुसने ना दें क्योंकि टैगोर फासिस्ट ताकतों के खिलाफ थे.

छात्रों ने अमित शाह के प्रति अपनी सख्त नाराजगी जताते हुए शांति निकेतन ( Vishwa Bharti) के कुलपति विद्युत चक्वर्ती को पत्र लिख कर कहा है कि गुरू रवींद्र नाथ टैगर का आदर्श भाजपा के फासिस्ट सिद्धांतों के बिल्कुल उलट है. पत्र में लिखा गया है कि यह शांति निकेतन की परम्परा रही कि यहां से फासिस्ट ताकतों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई जाती है.

द टिलिग्राफ के अनुसार लेफ्ट विंग के छात्रों ने लिखे अपने पत्र में कहा गया है कि रवींद्र नाथ टैगोर हिटलर और मोसलनी के फास्सिट आइडियालॉजी के खिलाफ आवाज उठाने के प्रतीक रहे हैं. पत्र में कहा गया है कि 20 दिसम्बर को होटलर और मोसोलनी के आदर्शों पर चलने वाला व्यक्ति ( अमित शाह) कदम रखने वाले हैं. वह भारत में फासिज्म थोपने वालों के बड़े चेहरे हैं.

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यह पत्र विश्व भारती स्टुडेंट्स युनिटी ने कलपति को लिखा है.

गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर जाने वाले हैं. इस दौरान उनका कार्यक्रम शांतिनिकेतन में भी है.

स्टुडेंट युनिटी के नेता फालगुनी पान ने कहा है कि शाह को कोई अधिकार नहीं कि वह शांति निकेतन में आयें क्योंकि यह फासिस्जम के खिलाफ आवाज उठाने वाले टैगोर का कार्यस्थल है जिन्होंने पूरा जीवन फासिज्म के खिलाफ संघर्ष किया.

उन्होंने कहा कि अमित शाह ने पिछले कुछ वर्षो में देश में नफरत और विभाजन की राजनीति और एजेंडे को लागू किया है. जिसका पुरजोर विरोध विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया है. शांति निकेतन के छात्रों ने विभाजनकारी नागरिकता कानून, किसान विरोधी कानून और छात्रों के अधिकारों पर चोट पहुंचने वाले केंद्र के फैसले का लगातार विरोध करते रहे हैं.


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