‘बाबरी के साथ बराबरी: दलित मुसलमानों के आरक्षण अधिकार पर लगा प्रतिबंध भी हटाया जाये’

ऑल इंडिया युनाइटेड मुस्लिम मोर्चा ने कहा है कि बाबरी मस्जिद का विवाद सुलझना जितना जरूरी है उतना ही  जरूरी दलित मुसलमानों और ईसाइयों के लिए संवैधानिक बराबरी का दर्जा दिया जाना जरूरी है.

ऑल इंडिया युनाइटेड मुस्लिम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. एजाज अली ने कहा कि 1949-50 से बाबरी मस्जिद का मुद्दा अदालतों में चल रहा है. अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है. लेकिन उसी समय से दलित मुसलमानों का मामला भी अदालत में है. संविधान के अनुच्छेद 341 में दलितों को दिये जाने वाले आरक्ष की सुविधा से मुस्लिम और ईसाई दलितों को वंचित कर दिया गया जिससे संविधान प्रदत्त बराबरी पर रोक लग गयी. अब समय आ गया है कि बाबरी मस्जिद के साथ बराबरी के अधिकार पर भी फैसला हो.

मोर्चा द्वारा पटना के जकात भवन में आयोजित ‘बाबरी के साथ बराबरी’ विषय पर आयोजित सेमिनार में ये मुद्दा मजबूती से उठाया गया. सेमिनार की अध्यक्षता कमाल अशरफ ने की. इस अवसर पर एजाज अली ने कहा कि अयोध्या विवाद और अनुच्छेद 341 का विवाद एक ही समय से शुरू हुआ. तब राष्ट्रपति के अध्यादेश के द्वारा हिंदू दलितों के अलावा मुस्लिम दलितों को आरक्षण के अधिकार पर रोक लगा दी गयी.

तब से दलित मुसलमानों के साथ जो नाइंसाफी शुरू हुई वह अब तक जारी है. डा. अम्बडकर की जयंती पर आयोजित इस सेमिनार में वक्ताओं ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे पर जल्द सुनवाई करनी चाहिए.  उन्होंने कहा कि अयोद्धया विवाद दो समुदायों के बीच का विवाद है जबकि आरक्षण से किसी समाज को वंचित कर देना तो संविधान की मूल भावना का उल्लंघन है. उन्होंने अदालत से अपील की कि आरक्षण के इस विवाद को जल्द सुलझाया जाये और दलित मुसलमानों को उनका हक बहाल किया जाये.

इस अवसर पर मोर्चा के अनेक पदाधिकारियों ने अपनी बातें रखीं. इनमें असगर खान, शमशाद आलम, मुश्ताक, बच्चन समेत अनेक लोगों ने अपने विचार रखे.

 

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