बजट ऑपरेशन : क्यों झारखंड से भी फिसड्डी होता गया बिहार

बजट ऑपरेशन : क्यों झारखंड से भी फिसड्डी होता गया बिहार

क्या आप जानते हैं कि प्रति व्यक्ति आय में बिहार देश में सबसे निचले पायदान पर है। झारखंड से भी गरीब। क्यों? जानिए क्या कहा अर्थशास्त्री डीएम दिवाकर ने।

कुमार अनिल

आज बिहार विधानसभा में 2021-22 का बजट पेश हुआ। बिहार के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डीएम दिवाकर ने बिहार बजट पर कहा कि बिहार की तीन संपदा है। जमीन, पानी और श्रम। बिहार बजट में इन तीनों की घोर उपेक्षा की गई है। कोरोना काल में लगभग एक करोड़ लोग बिहार लौटे। तब बिहार सरकार ने कहा था कि अब सिर्फ रोटी कमाने के लिए किसी को बाहर नहीं जाना होगा। लेकिन सरकार खुद अपनी ही घोषणा भूल गई। इस बजट में दूसरे प्रदेशोंं से लौटे कुशल-अकुशल मजदूरों को रोजगार देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है।

डीएम दिवाकर ने कहा कि बिहार कृषि प्रधान प्रदेश है, लेकिन कृषि का बजट कम कर दिया गया है, जो समझ से परे है। इसी क्षेत्र ने कोरोना काल में करोड़ों लोगों को बचाया, लेकिन इसी का बजट कम कर दिया गया। सरकार ने नारा दिया था-हर खेत को पानी। लेकिन आज भी सच्चाई यही है कि बिहार के किसान अपनी जमीन पर सिर्फ डेढ़ फसल ( फसल सघनता 1.44 है) कर पाते हैं। उनके खेत तक कैसे पानी पहुंचे, इसके लिए बड़ा प्रयास करने के बजाय सरकार ने कृषि का बजट ही छोटा कर दिया।

पिछले साल कृषि में ग्रोथ रेट माइनस तीन था। उसे ठीक करने के लिए कोई होम वर्क नहीं किया गया। यदि खेती की हालत नहीं सुधरेगी, तो बिहार कैसे आगे बढ़ेगा।

अर्थशास्त्री डीएम दिवाकर ने कहा कि ऊपर से देखने पर लगता है कि बिहार का बजट आकार इस बार सात हजार करोड़ बढ़ा है, लेकिन वास्तव में यह तीन फीसदी छोटा ही हुआ है। पिछले साल इनफ्लेशन रेट 6.6 था।

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मैपिंग इनइक्वालिटी इन बिहार पुस्तक के लेखक डीएम दिवाकर ने कहा कि बिहार में असमानता तेजी से बढ़ रही है। पटना में प्रति व्यक्ति सालाना आय 1 लाख 12 हजार है, वहीं शिवहर में सिर्फ 17 हजार रुपए है। बिहार के 17 जिले ऐसे हैं, जहां प्रति व्यक्ति आय 25 हजार रुपए से भी कम है। वहीं अन्य प्रदेशों से तुलना करें, तो बिहार इस सूची में लगातार अंतिम पायदान पर है। झारखंड और ओ़ड़िशा भी बिहार से बहुत आगे हैं।

गरीब के घर खुशहाली का एक रास्ता था, वह भी बंद

डीएम दिवाकर ने कहा कि पहले गरीब के पास आगे बढ़ने का एक रास्ता था। वह सोचता था कि बच्चों को पढ़ाएंगे, तो घर में कल खुशहाली आएगी, लेकिन राज्य सरकार ने शिक्षा का भी बंटाधार कर दिया है। अब गरीब के जीवन में खुशहाली आने का वह रास्ता भी बंद हो गया है।

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