चमकी बीमारी से पीडि़त बच्‍चों के पुनर्वास की मांग

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से बच्चों की हो रही मौत को रोकने में केन्द्र तथा राज्य सरकार को पूरी तरह से विफल बताया और दोनों सरकारों से पीड़ित बच्चो के पुनर्वास की व्यापक योजना बनाने की मांग की।

भाकपा के राज्यसभा सदस्य और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव बिनॉय विश्वम ने आज मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में एईएस पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों से मिलकर लौटने के बाद यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने परिस्थिति से मुकाबले के लिए कोई तत्परता नहीं दिखाई जिसके कारण ए ई एस पीड़ित बच्चों की मौत की संख्या बढ़ती गई । उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों ने यदि जिम्मेदारी निभाई होती तो बच्चों की बड़ी संख्या में मौत को रोका जा सकता था।

श्री विश्वम ने केंद्र और राज्य सरकार से एईएस पीड़ित बच्चों के पुनर्वास के लिए तत्काल व्यापक योजना बनाने की मांग की । उन्होंने कहा कि एईएस पीड़ित बच्चों की जान बच भी जाती है तो उनमें कुछ हद तक अपंगता, शारीरिक विकास की समस्या या अन्य तकलीफें होने की संभावना ज्यादा रहती है इसलिए इसे देखते हुए उनके लिए एक व्यापकपुनर्वास योजना बनाई जानी चाहिए ।भाकपा नेता ने कहा कि एईएस पीड़ित बच्चे बेहद गरीब परिवार से हैं इसलिए केंद्र सरकार की ओर से उन्हें आर्थिक मदद भी दी जानी चाहिए । केरल से राज्यसभा के सदस्य श्री विश्वम ने कहा कि पिछले शुक्रवार को उन्होंने सदन में मुजफ्फरपुर के मामले को उठाया भी था ।

श्री विश्वम ने कहा कि मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच अस्पताल में पीड़ित बच्चों उनके परिजनों और चिकित्सकों से उन्होंने विस्तार से बात की । इस दौरान चिकित्सकों ने संतोष जताया कि बारिश हो जाने के कारण एईएस पीड़ित बच्चों के अस्पताल में आने की संख्या में की कमी आई है लेकिन दूसरी ओर स्थानीय लोग अभी भी चिंतित हैं और उनका कहना है कि बारिश हो जाने का यह अर्थ नहीं है कि उनके बच्चे सुरक्षित हैं । उनका कहना है कि लगातार वर्षा नहीं हुई तो प्रभावित इलाके से एईएस के और नए मामले सामने आ सकते हैं।
भाकपा नेता ने कहा कि लीची को एईएस खेलने के लिए जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता । बच्चों का कुपोषित होना भी इस बीमारी के फैलने का एक बहुत बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि यदि शरीर कमजोर और कुपोषित होगा तो लीची खाने से टॉक्सिन पैदा होगा । इसलिए लीची को ए ई एस के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है।

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