Doctor ने पुरुष मरीज को लिख दी गर्भ रोकने की दवा

Doctor द्वारा मरीज के पेट में कैंची छोड़ने की घटना तो आप ने सुनी होगी पर क्या आपने यह सुना कि किसी पुरुष को डॉक्टर ने गर्भ रोकने की दवा दे दी हो?

दीपक कुमार ठाकुर, (बिहार ब्यूरो चीफ)

दरभंगा:डीएमसीएच में अजब मामला सामने आया है। दो पुरुषों को गर्भ रोकने की दवा Doctor ने लिख दी। जब अस्पताल की फजीहत शुरू हुई तो अस्पताल अधीक्षक ने डॉक्टर से जवाब मांगा है।
मामला डीएमसीएच के सर्जरी विभाग के डॉ. रामजी ठाकुर ( Dr Ramji Thakur) की यूनिट से जुड़ा है।
मंगलवार को यह मामला सामने आने पर अस्पताल प्रशासन स्तब्ध रह गया। आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाजरत मरीजों के पुर्जों पर धड़ल्ले से इन दवाओं के लिखे जाने की बात सामने आते ही अस्पताल अधीक्षक डॉ. राज रंजन प्रसाद ( Dr Ranjan Prasad) ने यूनिट हेड डॉ. रामजी ठाकुर से स्पष्टीकरण पूछा है। स्पष्टीकरण की प्रतिलिपि सर्जरी विभागाध्यक्ष को भी भेजी गई है।

Doctor Ramji Thakur की युनिट का मामला

डॉ. रामजी ठाकुर की यूनिट में मरीजों को दवा उपलब्ध कराने वाले पुर्जे पर नजर पड़ते ही अस्पताल के फार्मासिस्ट चौंक गए। फार्मासिस्ट ने दो पुरुषों व एक महिला मरीज के पुर्जे को केन्द्रीय दवा स्टोर के मेडिकल ऑफिसर डॉ. मनोज कुमार को दिखाया। तीनों मरीजों को अलग-अलग परेशानी थी। बावजूद इसके तीनों पुर्जे पर प्रेगनेंसी सस्टेन करने व गर्भवती को उल्टी रोकने में काम आने वाली दवा लिखी थी।
मरीजों के पुर्जों पर इन दवाओं को लिखा देख डॉ. कुमार ने अधीक्षक को मामले से अवगत कराया। सूत्रों के अनुसार जिन दो पुरुषों को दवा लिखी गई थी, इनमें से एक को पांव में जख्म है, वहीं दूसरी को हाइड्रोसिल की बीमारी है। वहीं जिस महिला मरीज को यह दवा लिखी गई है, उसे पेट में गांठ है। प्रेगनेंसी से उसका कोई वास्ता नहीं है।
इन दवाओं के अलावा मरीजों के पुर्जे पर कई तरह की महंगी दवाएं लिखी पायी गईं। बताया जाता है कि तीनों पुर्जे पर डॉ. ठाकुर के हस्ताक्षर हैं। अस्पताल अधीक्षक की ओर से स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि आयुष्मान के तहत इलाजरत मरीजों को वही दवा लिखी जाए जो अस्पताल में उपलब्ध हैं। दवा उपलब्ध नहीं रहे तभी मरीजों को बाहर की दवा लिखी जाए।

लापरवाही या जानकारी की कमी

आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी सह उपाधीक्षक डॉ. मणि भूषण शर्मा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन बेहद गंभीर है। वहीं, पूछने पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. राज रंजन प्रसाद ने भी इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पुर्जे पर दो ऐसी दवाएं लिखी गई हैं जो गर्भवती को लिखी जानी है। डॉ. प्रसाद ने बताया कि यूनिट हेड डॉ. रामजी ठाकुर से जवाब-तलब किया गया है। उसकी प्रतिलिपि सर्जरी विभागाध्यक्ष को भी भेजी गई है। बहरहाल इस मामले ने संबंधित यूनिट की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसी खास कम्पनी की दवा को प्रोमोट करने के लिए इस बात का भी ध्यान नहीं दिया गया कि दवा का इस्तेमाल किस बीमारी में करना है। गर्भवती को दी जाने वाली दवा का हाइड्रोसिल, जख्म व गांठ के इलाज में क्या रोल है, यह निश्चित रूप से जांच का विषय है।

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