Hijab विवाद के बीच अरुणाचल के प्राइवेट स्कूलों का नायाब फैसला

Hijab विवाद के बीच अरुणाचल के प्राइवेट स्कूलों का नायाब फैसला

कर्नाटक Hijab विवाद के बीच अरुणाचल के प्राइवेट स्कूलों ने अलग तरह का फैसला लिया है। हर सोमवार को छात्र अपनी परंपरा के अनुसार कपड़े पहन कर आएंगे।

कर्नाटक में हिजाब का विरोध तिरंगे के विरोध तक पहुंच गया। वहां मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही है। इस बीच उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों ने एक नए तरह का फैसला लिया है। प्राइवेट स्कूलों के एसोसिएशन ने एक सामूहिक फैसला लिया है कि अब छात्र-छात्राएं हर सोमवार को स्कूल ड्रेस में नहीं आएंगे, बल्कि उनकी जो परंपरागत पोशाक है, उसमें आएंगे। आम तैर से अरुणाचल में प्राइवेट स्कूल प्रबंधन के इस फैसले का स्वागत किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इससे परंपरागत कपड़ों की बुनाई-सिलाई करनेवाले बुनकरों को भी लाभ होगा।

द हिंदू की एक खबर के अनुसार फैसला अरुणाचल प्रदेश प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशऩ ने यह फैसला प्रदेश के बुनकरों की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा छात्रों के अपनी परंपरा से जुड़ाव को बढ़ावा देने के मद्देनजर यह फैसला लिया है। हर छात्र को यह आजादी होगी कि वह अपनी पसंद की परंपरागत पोशाक पहन कर स्कूल आ सकता है। प्राइवेट स्कूलों का यह फैसला मार्च में नए सत्र के साथ लागू होगा।

अरुणाचल प्रदेश के 180 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों के प्रतिनिधियों ने पिछले छह फरवरी को इस आशय का प्रस्ताव पारित किया। प्राइवेट स्कूल प्रबंधन समितियों के प्रतिनिधियों ने यह फैसला अभिभावकों की सलाह के बाद लिया।

मालूम हो कि अरुणाचल प्रदेश में कोई एक ही जनजाति नहीं है और न ही कोई एक ही परंपरागत ड्रेस है। प्रदेश में सौ से अधिक जनजातियां हैं और सबके परंपरागत ड्रेस में भिन्नताएं हैं। हर जनजाति के छात्र अपनी परंपरागत ड्रेस पहन कर आएंगे। जो सोग समझते हैं कि एक देश में एक ड्रेस होना चाहिए, उन्हें अरुणाचल के उदाहरण से समझ जाना चाहिए कि भारत विविधताओं का देश है।

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