क्या ओवैसी का दामन थाम सकते है कुशवाहा ?

क्या ओवैसी का दामन थाम सकते है कुशवाहा ?

शाहबाज़ की इनसाइड पोलिटिकल स्टोरी

बिहार चुनाव से पहले सियासत में बड़ा उलटफेर होने की सम्भावना है. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा जो महागठबंधन से लेकर, एनडीए तक को टटोल चुके है के ओवैसी के नेतृत्व वाले तीसरे मोर्चे में शामिल होने की प्रबल सम्भावना है.

आपको बता दें की हाल ही में महागठबंधन (Grand Alliance) से अलग होकर NDA (National Democractic Alliance) में शामिल होने की चर्चाओं के बीच आरएलएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मिले लेकिन सीट बटवारे पर बात नहीं बनी. इसके बाद RLSP के प्रधान महासचिव माधव आनंद माधव आनंद ने कहा कि महागठबंधन आईसीयू में चला गया है. जिससे संकेत मिलते है कि कुशवाहा महागठबंधन को छोड़ने की बात तय है.

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इसके बाद मीडिया के हलकों में उनके कुशवाहा के NDA गठबंधन में शामिल होने की चर्चा ने ज़ोर पकड़ा। कुछ चैनलों ने तो आरएलएसपी को NDA से 5 सीटें मिलने की सम्भावना जाता दी. लेकिन अगर जदयू और लोजपा के सीट बटवारे को लेकर तनातनी को गौर से देखे तब पता चलता है कि जदयू हर कीमत पर NDA में बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहती है. वही बिहार में भाजपा की भी महत्वाकांक्षा है. ऐसे में अगर कुशवाहा NDA में आते है तो जदयू को अपने हिस्से से सीटें देनी पड़ेंगी जिससे जदयू का वज़न कम होगा। जो जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार किसी भी कीमत पर नहीं चाहते है. इस तरह कुशवाहा के NDA में जाने की सम्भावना भी नहीं के बराबर है.

कल ही पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा जो खुद कुशवाहा समाज से आती है मुख्यमंत्री से मिली थी. मंजू वर्मा ने कहा कि वह निश्चित ही चुनाव लड़ेंगी। इसके बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि नीतीश कुमार ने NDA में उपेंद्र कुशवाहा का विकल्प खोज लिया है.

उपेंद्र कुशवाहा के पास क्या विकल्प है ?

पहला विकल्प पप्पू यादव (Pappu Yadav) की जन अधिकार पार्टी (JAP) हो सकती थी. लेकिन हाल ही में पप्पू यादव की पार्टी ने SDPI (Social Democratic Party of India) के साथ गठबंधन कर लिया। बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियां साथ में चुनाव लड़ेंगी। ऐसे में कुशवाहा के पप्पू यादव के साथ गठजोड़ की सम्भावना भी नहीं है.

दूसरा विकल्प पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की UDA (United Democratic Alliance) हो सकती है. लेकिन इसमें समस्या यह है कि इस गठबंधन में पहले से ही 19 पार्टियां शामिल हो चुकी है. पार्टियों की संख्या के हिसाब से यह गठबंधन महागठबंधन और NDA से भी बड़ा हो गया है. भाजपा के पूर्व कद्दावर नेता रहे यशवंत सिन्हा ने कहा था कि वह किसी भी भाजपा विरोधी या सेक्युलर दल से गठबंधन को तैयार है. लेकिन कुशवाहा समाज का एक बड़ा हिस्सा भाजपा को वोट करता है. 2019 लोक सभा चुनाव में आरएलएसपी एक भी सीट जीत पाने में नाकाम रही थी. ऐसे में कुशवाहा UDA की तरफ देखेंगे या UDA उनकी तरफ देखेगा ऐसा मुमकिन नहीं लगता।

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क्या ओवैसी से हाथ मिलाना कुशवाहा के लिए आखरी रास्ता है ?

तीसरा विकल्प असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के नेतृत्व वाली तीसरा मोर्चा है. जिसमे ऊपर दिए गए विकल्पों के अनुसार कुशवाहा के जाने की प्रबल सम्भावना है. AIMIM (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) प्रमुख ओवैसी ने बिहार में तीसरे मोर्चे का गठन करने का मन बना लिया है. हाल ही में पटना दौरे पर ओवैसी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसास यादव (Devendra Prasad Yadav) की समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक (SJDD) के साथ गठबंधन कर लिया। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह सम्प्रदायवाद के खिलाफ रहने वाली किसी भी पार्टी से गठबंधन कर सकते है. ओवैसी का गठबंधन UDSA (United Democratic Secular Alliance) है जिसमे कई पार्टियां और दलों के नेता शामिल होने का मन बना रहे है.

ऐसे में ओवैसी की UDSA एकमात्र ऐसा गठबंधन लग रहा है जो कुशवाहा को समायोजित (Accommodate) कर सकता है. इससे दोनों को फायदा हो सकता है. AIMIM जहाँ बिहार के 17 % मुस्लिम समाज का समर्थन होने की बात कर रही है. ऐसा भी माना जा रहा है कि इस गठबंधन में कुशवाहा को सम्मानजनक सीटें मिल सकती है. दूसरी तरफ ओवैसी को भी फायदा हो सकता है. कुशवाहा के आने से इस गठबंधन को और भी जनसमर्थन मिल सकता है.

AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान (Akhtarul Iman) ने कहा भी था कि वह साम्प्रदायिकता के खिलाफ रहने वाली किसी भी पार्टी के से हाथ मिलाने को तैयार है.

AIMIM को आरएलएसपी को समायोजित करने में समस्या नहीं होगी क्यूंकि कुशवाहा ने अपनी छवि बनायीं हुई है. उन्होंने अभी तक कोई सांप्रदायिक बयान नहीं दिया है. लेकिन इसमें ज़रूरी बात यह है कि अगर कुशवाहा ओवैसी की UDSA में शामिल होते है तो उन्हें इसकी स्क्रिप्ट तैयार करनी होगी।

फिलहाल आज आरएलएसपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमे सभी ज़िलों के जिलाध्यक्ष शामिल हुए. पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को गठबंधन चुनने का निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया है.

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