माले विधायक बोले-गरीबों को शिक्षा से वंचित कर रही सरकार

माले विधायक बोले-गरीबों को शिक्षा से वंचित कर रही सरकार

शिक्षा रोजगार यात्रा के 7 वें दिन बिहारशरीफ के दायरा पर में माले की सभा हुई। माले के विधायक मनोज मंजिल ने शिक्षा से गरीबों को वंचित करने का आरोप लगाया।

संजय कुमार

आज बिहारशरीफ में माले की केन्द्रीय कमिटी सदस्य व इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अगिआंव विधायक कॉ मनोज मंजिल, इनौस राज्य सचिव सुधीर, आइसा नेता पप्पु , खूश्बू कुमारी आदि नेताओ का भव्य स्वागत व अभिनन्दन किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए कॉ मनोज मंजिल ने कहा कि आज हमारा देश एक जूझारू किसान आंदोलन के दौर से गुजर रहा, देश में लाखो किसान खेती- किसानी बचाने के लिए मोदी सरकार द्वारा जबरन थोपे जा रहे तीन कृषि कनूनों के खिलाफ एकजूट हैं। हम किसान आंदोलन और उनकी मांगो का समर्थन करते है।

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दूसरी तरफ देश के नौजवान सबसे ज्यादा बेरोजगारी की मार झेल रहे है। मोदी सरकार देश की सरकारी कम्पनियों और संसाधनो को अम्बानी-अंडानी जैसे पूजीपतियों के हाथों बेच रही है। भारतीय जनता की लाइफलाइन और प्रति वर्ष हजारो नौजवानों को रोजगार मुहैया कराने वाला रेलवे को भी सरकार तेजी से प्राइवेट हाथो में बेच रही है।

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कोरोना महामारी के बाद बेरोजगारी के बढ़ते संकट को मोदी-नीतिश सरकार की नीतियों ने और भी गहरा बना दिया। लाखों की संख्या में पद खाली हैं, लेकिन बहाली या तो बंद या भ्रष्टाचार, पेपर लीक, अनियमितता और घोटालों से ग्रस्त। पिछले विधान सभा चुनाव में बिहार के तमाम छात्रों-युवाओ ने रोजगार की मांग को केन्द्रीय सवाल बना दिया।

एनडीए 19 लाख रोजगार देने का वादा कर आज सरकार में है।लेकिन अब वह रोजगार पर किए गए वादे को भूल गई है। यहां तक की विधान सभा में राज्यपाल के अभिभाषण में रोजगार शब्द का प्रयोग करने से भी परहेज किया गया। बिहार में बेरोजगारी का मुद्दा इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि इस राज्य में बेरोजगारी की दर भारत के औसत बेरोजगारी दर से भी अधिक है।

पलायन युवाओं की नियति बनाई जा रही है और नौकरी के नाम पर संविदा, मानदेय और ठेका द्वारा नौजवानों को गुलामी प्रथा में धकेला जा रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अह्वान किया कि छात्र- युवा रोजगार के सवाल पर अपनी अवाज बुलंद करे और 1मार्च को विधान सभा के घेराव में अधिक संख्या मे पटना पहुंचे।

सभा को इनौस राज्य सचिव सुधीर कुमार ने कहा कि कोरोना काल ने बिहार की स्वास्थ्य-व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। उप-स्वास्थ्य केन्द्रो से लेकर अनुमंडल स्तरीय और जिला स्तरीय अस्पतालो की हालत दयनीय है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार बिहार मे एक लाख लोगो पर सिर्फ 26 बेड है। जबकि राष्ट्रीय औसत 138 बेड का है।सरकारी अस्पतालो मे डॉक्टरो,नर्सो और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी है। प्राइवेट अस्पताल इलाज के नाम पर लूट का गोरखधंधा चला रही है। आम जनता बगैर इलाज के दम तोड़ रही है या महंगे इलाज से कंगाल हो रही है।

वही सभा को माले जिला सचिव सुरेन्द्र राम ने कहा कि कोरोना काल और लॉक डाउन की आड़ मे स्कुलो कॉलेजो को बंद कर दलित गरीब मजदुर किसान के बच्चो को शिक्षा से बंचित किया जा रहा है। इस कोरोना काल मे सरकार का एक भी काम नही रूका है? लेकिन स्कुल को बंद करने की साजिस रची जा रही है। और आँन लाइन शिक्षा के नाम पर कमजोर वर्ग के लोगो को बंचित करने की योजना बनायी जा रही है। वैसे परिस्थिति में बिहार के छात्र युवा को शिक्षा रोजगार के सवाल पर आंदोलन के सिवा दुसरा कोई रास्ता नही है। उन्होने आहवान किया कि हजारो की संख्या में बिहार बिधान सभा घेराव में नालन्दा से पटना में भाग ले ।

सभा की अध्यक्षता इनौस के जिला सचिव शत्रुधन कुमार व संचालन आइसा के जिला संयोजक जयंत आनंद ने कि। सभा मे माले जिला कमिटी सदस्य पाल बिहारी लाल, खेग्रामस जिला सचिव रामधारी दास, महेन्द्र प्रसाद, रामदास अकेला ,इंसाफ मंच के जिला संयोजक सरफराज अहमद खान अधिवक्ता, शहर के बुद्धिजीवी आफताब हसन शम्स ,आइसा के प्रिंस कुमार, इनौस के किशोर साव ,इनौस के जिला सह सचिव रामदेव चौधरी समेत दर्जनो छात्र युवाओ ने संबोधित किया।

शिक्षा रोजगार यात्रा सभा मे किसान कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष गौरव कुमार , छात्र नेता गोपाल यादव , आइसा के जिला संयोजन समिति के सदस्य रौशन कुमार, जितेंद्र कुमार , अभिषेक कुमार , मो० इमरान , मो० मोइन सहित दर्जनों छात्र – युवा शामिल रहे ।

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