विख्यात साहित्यकार मुशर्रफ आलम ज़ौक़ी बने राष्ट्रीय सहारा उर्दू के ग्रूप एडिटर, बधाइयों से पटा सोशल मीडिया

विख्यात साहित्यकार मुशर्रफ आलम ज़ौक़ी बने राष्ट्रीय सहारा उर्दू के ग्रूप एडिटर, बधाइयों से पटा सोशल मीडिया

उर्दू के विख्यात आलोचक व कहानीकार मुशर्रफ आलम जौकी राष्ट्रीय सहारा उर्दू के ग्रुप एडिटर बनाये गये हैं. यह अखबार दिल्ली, मुम्बई, पटना, गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ, बैंगलोर, हैदराबाद और कोलकाता से एक साथ सात राज्यों से प्रकाशित होता है.

मुशरर्फ आलम जौकी ने नौकरशाही डॉट कॉम को बताया है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है और उनका पहला लक्ष्य सभी संस्करणों के साथ तालमेल बिठाने के लिए वह सात राज्यों के दौरे पर निकल रहे हैं. इस दौरान वह तमाम संस्करणों के सम्पादकों और सीनियर पत्रकारों के साथ बैठकें करेंगे.

गौरतलब है कि रोजनामा राष्ट्रीय सहारा, सहारा परिवार का प्रमुख मीडिया संस्थान है और इसकी पहुंच राष्ट्रव्यापी है.

बिहार के आरा के मूल निवासी मुशर्रफ आलम जौकी हिंदी-उर्दू साहित्य का जाना- पहचाना नाम है. उनकी अनेक कहानी संग्रह, नावेल और आलोचना की पुस्तकें चर्चित रही हैं. इनमें मुसलमान, लैंडस्केप के घोड़े, सिलसिला रोज वो शब, ले सांस भी आहिस्ता, बयान, पोकेमान की दुनिया आदि काफी चर्चित रही हैं.

जौके राष्ट्रीय सहारा के ग्रुप एडिटर बनाये जाने के बाद सोशल मीडिया में उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया. इम्तेयाज अहमद ने फेसबुक पर लिखा   हम आरा वासियों के लिये गर्व की बात है कि इस उर्वर मिट्टी में जन्में वरिष्ठ शायर मशकूर आलम बशीरी के पुत्र कहानीकार मुशर्रफ आलम जौकी, जिनका व्यक्तित्व किसी परीचय का मुहताज नही, राष्ट्रीय सहारा (उर्दू) के ग्रूप एडिटर की जिम्मेदारी संभाल ली है. यह न सिर्फ़ उर्दू बस्ती बल्कि उर्दू मीडिया के लिये शुभ आगमन है.

भगवान दास मोरवाल ने लिखा है कि ज़ौक़ी को यह सम्मान और ज़िम्मेदारी मिलने की ढेरों शुभकामनाएँ . उम्मीद करता हूँ कि वे हिंदी-उर्दू अदब को दूध-पानी की तरह आपस में मिलाने का प्रयास करेंगे .

अबुबकर सब्बाक ने लिखा है कि जौकी को यह जिम्मेदारी मिलना उर्दू दुनिया के एक नये दौर की शुरुआत है. वहीं हनीफ खान ने फेसबुक पर लिखा है कि मुशर्रफ आलम जौकी को ग्रूप एडिटर बनाये जाे से सहारार अखबार को भी बधाई क्योंकि उन्होंने एक योग्य व्यक्ति को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी.

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