राबड़ी ने रहस्य खोल कर मचाया तूफान, नीतीश क्यों नहीं खोल रहे जुबान?

राबड़ी ने रहस्य खोल कर मचाया तूफान, नीतीश क्यों नहीं खोल रहे जुबान?

नीतीश के गठबंधन में लौटने की बेचैनी पर लालू के खुलासे के बाद अब राबड़ी देवी ने एक ऐसे रहस्य से पर्दा उठा दिया है जिसके अनुसार नीतीश उनसे माफी मांग कर भी महागठबंधन में लौटने के लिए बेकरार थे.

राबड़ी देवी ने ट्विट करके कहा है कि नीतीश कुमार महागठबंधन में वापस होने के लिए गिड़गिड़ा रहे थे और बार-बार अपना दूत उनके पास भेज रहे थे.

नीतीश के दूत को घर से निकाला

राबड़ी ने कहा है कि नीतीश कुमार तरह-तरह की डील के साथ अपने दूत उनके घर भेजते थे. एक बार उन्होंने ( राबड़ी देवी) नीतीश कुमार के दूत को अपने घर से निकाल दिया था.

राबड़ी देवी ने ट्विट किया है कि “नीतीश कुमार माफ़ी और अनेकों प्रकार की लुभावनी डील के साथ महागठबंधन में आने को गिड़गिड़ा रहे थे। बार-बार उनके कबूतर चिट्ठी लेकर आ रहे थे।एकबार उनके दूत को इस विषय पर बात करने पर मैंने उसे घर से निकाल दिया था। जनता के विश्वास और वोटों का सौदा करने वाले पलटू किसी के भी सगे नहीं है”.

याद रहे कि 2017  नीतीश कुमार ने एक दिन अचानक अपनी सरकार का इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया था. और उसी दिन भाजपा के साथ मिल कर नयी सरकार बना ली थी. नीतीश कुमार के इस फैसले पर राजद अवाक रह गया था. तब तेजस्वी ने कहा था कि महागठबंधन के नाम पर प्राप्त जनमत की नीतीश कुमार ने डकैती कर ली.

लालू ने पुस्तक में लिखी ये बात

उधर हाल ही में लालू प्रसाद ने अपनी नयी किताब अ जर्नी फ्राम गोपालगंज टु रायसीना में लिखा है कि नीतीश कुमार कुछ ही दिनों बाद भाजपा से अलग हो कर फिर से राजद के महागठबंधन में वापस आने के लिए बेचैन हो गये थे. तब उन्होंने महागठबंधन में वापसी के लिए बात चीत करने को प्रशांत किशोर को भेजा था. लेकिन लालू प्रसाद ने नीतीश के इस ऑफर को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि नीतीश पर अब भरोसा नहीं किया जा सकता.

इन तमाम खुलासों का अभी तक नीतीश कुमार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है और वह इस मुद्दे पर बिल्कुल चुप हैं.

इसी बीच अब राबड़ी देवी ने यह कह कर सियासी तूफान मचा दी है कि उनके पास नीतीश ने अपने दूत को भेज कर माफी मांगने के लिए भी तैयार थे. लेकिन उन्होंने उनके दूत को घर से निकाल दिया था.

अब देखना है कि राबड़ी देवी के इस दावे पर नीतीश कुमार कुछ कहते हैं या चुप्पी बनाये रखते हैं.

 

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