राजद ने क्यों कहा जदयू -भाजपा गठबंधन बेमेल है

राजद ने क्यों कहा जदयू -भाजपा गठबंधन बेमेल है

आज राजद ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें जदयू नेता मंच से कह रहे हैं कि गठबंधन कब भी टूट जाएगा। पुराने मुद्दों के साथ जाति आधारित जनगणना भी बनेगा कारण।

कुमार अनिल

जबसे नई जदयू-भाजपा सरकार बनी है, तभी से सियासी हलके में इसकी स्थिरता पर सवाल उठते रहे हैं। अब जदयू के एक कार्यक्रम में पार्टी के नेता साफ-साफ कह रहे हैं कि अपनी पार्टी को मजबूत करिए, यह गठबंधन कब भी टूट जाएगा।

इस बीच आज राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने जनगणना-2021 में जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक स्थिति संबंधित जानकारी को शामिल करने का नोटिस दिया है। जनगणना में जाति आधारित सूचनाएं दर्ज करने के पक्ष में खुद नीतीश कुमार भी हैं। इस मामले में भाजपा के किसी नेता ने खुलकर इस मांग का समर्थन नहीं किया है। बातचीत में कई नेता जनगणना में इस पक्ष को शामिल करने के विरोध में मत जाहिर करते हैं। मालूम हो कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद इस मांग को जोर-शोर से उठाते रहे हैं।

उत्तराखंड में सत्ता पलट के बाद तीरथ रावत नये CM

जदयू के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह संगठन के विस्तार पर लगातार बैठकें कर रहे हैं। वे बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने का अभियान शुरू कर चुके हैं। हाल में मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर राज्य के हर बूथ पर विकास दिवस मनाने का एलान किया गया था। अनेक बूथों पर ऐसे कार्यक्रम भी हुए।

नीचे बूथ तक के अलावा पार्टी को ऊपर से भी मजबूत करने के लिए उत्तर और दक्षिण बिहार में बांटकर अलग-अलग टीम बनाई गई है। आप गौर करें, तो जदयू का फिलहाल सबसे ज्यादा जोर संगठन की मजबूती पर है।

बॉलीवुड फेल, बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ रहा खेला होबे-खेला होबे

जदयू ने अपने इतिहास में कभी संगठन पर इतना जोर नहीं दिया। संगठन पर जोर के लिए भाजपा और कम्युनिस्ट ही जाने जाते रहे हैं। तो पहली बार संगठन पर इतना जोर क्यों?

जदयू प्रमुख राजनीति मुद्दों पर भाजपा के साथ है। किसान आंदोलन, कश्मीर में धारा 370 हटाने जैसे मुद्दों पर वह केंद्र के साथ है, लेकिन महंगाई के सवाल पर वह सरकार के पक्ष में कभी तर्क देता नहीं दिखा।

तो सवाल यही है कि राजद ने इस गठबंधन को बेमेल क्यों कहा? क्या जदयू को भय है कि धीरे-धीरे भाजपा उसके आधार के हड़प लेगी? भाजपा दूसरे दलों के विधायकों को तोड़कर अपने पाले में लाने के लिए भी जानी जाती है। मध्यप्रदेश इसका उदाहरण है। क्या जदयू को डर है कि बिहार कहीं मध्यप्रदेश न बन जाए।

पाठकों को याद होगा, बिहार मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भाजपा दफ्तर में जिस तरह उल्लास छाया था, वैसा जदयू कार्यालय में उल्लास नहीं दिखा था। राजद ने गठबंधन को बमेल कहा, तो ऐसा कहने के कई आधार हैं। लोग कह रहे हैं, देखिए बंगाल चुनाव के बाद क्या होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*