नामचीन हस्तियों पर देशद्रोह के मुकदमे पर शिवानंद ने पूछा ऐसे व्यक्ति को क्या न्यायधीश बना रहना चाहिए?

नामचीन हस्तियों पर देशद्रोह के मुकदमे पर शिवानंद ने पूछा ऐसे व्यक्ति को क्या न्यायधीश बना रहना चाहिए?

 प्रधान मंत्री के नाम खत लिखने वाले रामचंद्र गुहा (Ramcandra Guha) समेत 49 नामचीन हस्तियों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने पर राजद के नेता शिवानंद तिवारी ने पूछा है कि क्या ऐसे न्यायधीश को न्याधीश बना रहना चाहिए ?

 राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने अपने बयान में कहा है कि नीतीश कुमार के प्रदेश में रामचंद्र गुहा के विरुद्ध देशद्रोह का मामला दर्ज हो गया है. रामचंद्र गुहा सहित देश के अन्य 49 लब्ध प्रतिष्ठित नागरिकों ने प्रधानमंत्री जी के नाम खुला पत्र लिखकर देश में भीड़ द्वारा हत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता ज़ाहिर की थी.उनका मानना है कि मुसलमानों और दलितों के विरुद्ध इस तरह की घटनाओं में विशेष रूप से वृद्धि हुई है. गुहा के अतिरिक्त उस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में श्याम बेनेगल, मणि रत्नम, अनुराग कश्यप, शोभा मुदगल आदि हैं.

अदालत के आदेश पर मुकदमा

श्री तिवारी ने कहा कि  उन लोगों के इस बयान पर मुज़फ़्फ़रपुर की अदालत में आदतन मुक़दमा दर्ज करने वाले एक वक़ील ने इन लोगों के ख़िलाफ़ देशद्रोह आदि का आरोप लगाकर अदालत में मामला दायर कर दिया. अदालत ने पुलिस को बयान देने वालों के विरूद्ध मुक़दमा दर्ज करने का आदेश दे दिया. स्थानीय पुलिस ने उन लोगों के विरूद्ध देशद्रोह सहित अन्य दफाओं में मुक़दमा दर्ज कर लिया है।
 श्री तिवारी ने कहा कि  अदालत भूल गई हमारे देश में लोकतंत्र है और हमारा संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार मानता है.अदालतों का काम संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है न कि उन अधिकारों के प्रयोग को अपराध मानकर उनके विरुद्ध मुक़दमा दर्ज करने का आदेश देना है।
तिवारी ने याद दिलाते हुए कहा कि रामचंद्र गुहा देश के वैसे बौद्धिकों में से हैं जो एक समय नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री की संभावना देखा करते थे. आज उन्हीं के विरुद्ध नीतीश कुमार के शासन में देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज हो चुका है.
  उन्होंने कहा कि  मैं नीतीश जी अनुरोध करूँगा कि सरकार इस पर क़ानूनी सलाह ले तथा मुक़दमा को समाप्त कराए. सरकार यह भी देखे कि अदालत ने ऐसा आदेश कैसे दे दिया है. लोकतांत्रिक देश में क्या ऐसे न्यायाधीश को न्यायाधीश बने रहना चाहिए !

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