आठ घंटे बीते, पूर्व CM मांझी के मांग की IPS ने नहीं ली नोटिस

आठ घंटे बीते, पूर्व CM मांझी के मांग की IPS ने नहीं ली नोटिस

झारखंड व बिहार में बड़ा अंतर है। झारखंड के मंत्री अधिकारी से कुछ कहें, तो तुरत नोटिस लिया जाता है। बिहार में पूर्व CM मांझी के बयान की IPS ने नहीं ली नोटिस।

आज पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भोजपुर में एक दलित की बेटी को उठा ले जाने और फिर मुकदमा नहीं उठाने पर दलितों की पिटाई का मामला उठाया। मामला इतना गंभीर है कि इसके बाद किसी संवेदनशील राज्य में तहलका मच जाता, लेकिन हाल यह है कि मांझी की मांग के आठ घंटे बाद तक किसी अधिकारी ने नोटिस तक नहीं ली।

आज पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भोजपुर के आईपीएस को टैग करते हुए ट्वीट किया-दलित बेटियों को उठा लो, केस करें तो केस उठाने के लिए जानलेवा हमला करो। भोजपुर के पिरौंटा में घटित इस घटना पर किसी तथाकथित हिन्दुवादी संगठनों/नेताओं की जबान खुलेगी या फिर गूंगे हो जाओगे? @IPSVinayTiwari जी इस घटना में शामिल लोगों एवं मुकदर्शक पुलिसकर्मियों पर अविलंब कारवाई करें। ये है वीडियो-

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रमाण के लिए वीडियो भी भेजा, जिसमें साफ दिख रहा है कि कुछ लोग डंडे के साथ हमला कर रहे हैं। इसके बाद भी किसी अधिकारी ने मांझी के बयान पर कोई आश्वासन तक देना गवारा नहीं किया। इसके बाद लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि जब पूर्व मुख्यमंत्री की मांग का कोई नोटिस लेनेवाला नहीं है, तो आम लोग कहां और किससे मांग करेंगे। यह भी ध्यान देने योग्य है कि दलितों पर हमला बिहार पुलिस वालों की उपस्थिति में हो रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने हिंदू संगठनों को भी कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने भाजपा-आरएसएस का नाम नहीं लिया है, लेकिन जाहिर है उनका इशारा इन्हीं संगठनों की तरफ है। सोशल मीडिया में कई लोगों ने मांझी की आलोचना की भी है कि उनके कारण दलितों का यह बुरा हाल है।

रितेश पासवान ने पूर्व मुख्यमंत्री के जवाब में लिखा-यही है पुलिस प्रशासन बिहार में पुलिस का एक हीं काम है वो है दारू पकड़ना और वाहन चेकिंग और चालान काट कर पैसा कमाना। पुलिस के सामने सब कुछ हो रहा है और खड़ा होकर तमाशा देख रहा है।

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