दो बार विधायक रहे पूर्वी चंपारण के सहदेव पासवान जदयू में शामिल

दो बार विधायक रहे पूर्वी चंपारण के सहदेव पासवान जदयू में शामिल

भाजपा के खिलाफ जदयू का सद्भावना बचाओ-देश बचाओ अभियान। पूर्वी चंपारण के पू्र्व विधायक सहदेव पासवान को उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में शामिल कराया।

जदयू का राज्यव्यापी अभियान सद्भावना बचाओ-देश बचाओ भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ अभियान है। इसी अभियान के तहत शनिवार को पूर्वी चंपारण में सद्भावना बचाओ-देश बचाओ सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन में पार्टी के वरिष्ठ नेता और संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी शामिल थे। उन्होंने अपने हाथों से पूर्व विधायक सहदेव पासवान को पार्टी की सदस्यता दी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित थे।

जदयू ने ट्वीट करके जानकारी दी कि BJP की पाखंडी, घिनौनी, समाज तोड़क व सामाजिक न्याय विरोधी राजनीति के खिलाफ़ पार्टी द्वारा मोतिहारी में आयोजित सद्भावना बचाओ- देश बचाओ कार्यक्रम में संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष @UpendraKushJDU , विधान पार्षद रामेश्वर महतो सहित दर्जनों पार्टी नेता आमजन के बीच हुए शामिल। मोतिहारी में आयोजित सद्भावना बचाओ- देश बचाओ कार्यक्रम में पिपरा से 2 बार विधायक रहे सहदेव पासवान जी, मुखिया राजू बैठा जी सहित दर्जनों साथियों ने जदयू की सदस्यता ग्रहण कीl इन्हें संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा जी ने हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं दी हैं।

इधर, जदयू के प्रवक्ता व स्वास्थ्य विशेषज्ञ डाॅ सुनील कुमार सिंह और प्रवक्ता अनुप्रिया ने पार्टी कार्यालय में प्रेस काॅन्फ्रेंस करके भाजपा द्वारा डेंगू के बहाने बिहार की जनता को गुमराह करने की साजिश की पोल खोलते हुए कहा कि पिछले कुछ हफ्तों से भाजपा नेता बिहार में डेंगू के फैलने को ऐसे प्रदर्शित कर रहे हैं जैसे पूरे हिंदुस्तान में डेंगू सबसे ज्यादा बिहार में ही फैल रहा हो। जबकि आँकड़े कहते हैं कि अक्तूबर के अंत तक बिहार से कहीं अधिक डेंगू के मामले बंगाल समेत कई राज्यों में मिल चुके हैं। प्रवक्ताओं ने कहा कि जबकि पिछले वर्षों के आँकड़े भाजपा के मुंह पर तमाचा है। वर्ष 2019 में बिहार में लगभग 7000 डेंगू के मामले सामने आए थे तब किसी भाजपा नेता का मुंह नहीं खुला था, क्यूंकि स्वास्थ्य मंत्री उनकी पार्टी के ही थे। इतना ही नहीं पिछले कुछ वर्ष के आँकडे़ बताते हैं कि बिहार की तुलना में कई ऐसे राज्य थे, जहां डेंगू के मामले बिहार से सैकड़ों गुने अधिक थे और वे भाजपा शासित प्रदेश थे। पिछले वर्ष ही उत्तर प्रदेश में लगभग तीस हज़ार डेंगू के मामले सामने आए थे जबकि बिहार में मात्र 633 डेंगू के मामले आए थे।

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