इन्हें सीबीआई के बजाये अपनी कुर्सी की आजादी चाहिए

नीलू रंजन – सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा एजेंसी की स्वायत्तता के लिए बने मंत्रिमंडलीय समूह (जीओएम) के सामने सीबीआई की स्वायत्तता के बजाय अपने अधिकार बढ़वाना चाहते हैं.ranjeet

रंजीत सिन्हा चाहते हैं कि सीबीआइ निदेशक का कार्यकाल दो साल से बढ़ाकर पांच साल करने के साथ ही उसे वित्तीय और प्रशानिक फैसलों में ज्यादा आजादी मिलनी चाहिए.

सिन्हा पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह तोते को पिंजड़े से पूरी तरह से आजाद करने के पक्ष में नहीं हैं. सीबीआइ सूत्रों के अनुसार पी. चिदंबरम की अध्यक्षता में गठित जीओएम के लिए तैयार प्रेजेंटेशन को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाए जाने पर रंजीत सिन्हा इसे जीओएम के सामने पेश करेंगे. प्रेजेंटेशन में सीबीआइ की स्वायत्तता के लिए इसके निदेशक के कार्यकाल को पांच साल करने की मांग की गई है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी भी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में उसके महानिदेशक को काफी वित्तीयव प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं, लेकिन सीबीआइ निदेशक को एजेंसी के हर छोटे-बड़े खर्च के लिए कार्मिक मंत्रलय से मंजूरी लेनी होती है.

उन्होंने कहा कि सीबीआइ के लिए आवंटित बजट में जरूरत के हिसाब से खर्च का विवेकाधिकार निदेशक को दिया जाना चाहिए। इसी तरह प्रतिनियुक्ति से लेकर स्थानांतरण तक में सीबीआइ निदेशक को कार्मिक व गृह मंत्रलय की हरी झंडी का इंतजार करना पड़ता है. प्रेजेंटेशन में सीबीआइ को सरकार की निगरानी से पूरी तरह मुक्त करने की मांग नहीं की गई है.

अदर्स वॉयस कॉलम के तहत हम अन्य मीडिया की खबरों को प्रकाशित करते हैं. यह खबर दैनिक जागरण से साभार है.

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