उमा, योगी, साक्षी जैसे बड़े चेहरे को यूपी की कमान सौंपने की भूल क्यों नहीं करेंगे मोदी?

नरेंद्र मोदी यूपी में सीएम बनाने के मामले में खुद अपने लिए चुनौती खड़ी करने की भूल नहीं करने वाले. वे किसी फायर ब्रांड नेता जैसे आदित्यनाथ, उमा भारती व साक्षी महाराज को सीएम बनाने के बजाये किसी गुमनाम चेहरे को आगे करना चाहेंगे.

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इर्शादुल हक, एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम

राजनीति का एक फार्मुला है कि बाहरी चुनौतियों की तरह आंतरिक चुनौतियों को भी अपने निंयत्रण में रखा जाये. और यह फार्मुल यह सबक देता है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में किसी ऐसे गुमनाम के सर सीएम का सेहरा बांधा जाये जो भविष्य में खुद नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए आंतिरक खतरा का कारण न बन जाये. मोदी यह नहीं चाहेंगे कि कोई जनाधार वाला नेता उत्तर प्रदेश का सीएम हो.

ऐसे में आदित्यनाथ, साक्षी महाराज, उमा भारती सरीखे नामों को आगे करने की संभावना कम ही दिखती हैं. क्योंकि इन नेताओं की अपनी पहचान है और इनकी बातों में अपना अपील है. और आने वाले दिनों में यूपी जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री खुद नरेंद्र मोदी व अमित शाह के लिए आंतिरक चुनौती न बने इसलिए भी यह संभावना कम है. हालांकि केशव प्रसाद मौर्य भी अच्छ संगठनकर्ता हैं इसलिए उन पर दाव लगाना मोदी के लिए शायद जोखिम भरा ही हो.

नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उदय को करीब से जानने वालों को पता है कि राष्ट्रीय राजनीति में उनके उदय के पीछे का सबसे बड़ा कारण यही है कि उन्होंने एक एक कर अपने प्रतिद्वंद्वियों को रास्ते से किनारा लगाया. लाल कृष्ण आडवाणी के कभी चहेते रहे मोदी खुद आडवाणी के लिए चैलेंज बन गये. आडवाणी को इस बात का आभास तब हुआ जब मोदी ने अपनी मजबूत पहचान बना ली. और तब हालात ऐसे हो गये कि आडवाणी चाह कर भी मोदी को नहीं रोक सके. उलटे मोदी ने आडवाणी को बड़ी बारीकी से मेनस्ट्रीम राजनीति से अलग-थलग कर दिया था.

दूसरी तरफ 2014 के चुनावी जीत के बाद जिन जिन राज्यों में चुनाव हुए हैं और जहां जहां बीजेपी की जीत हुई है उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के चेहरे को देखिए. जहां जहां भाजपा की सरकार पहले से थी, उन राज्यों को छोड़ कर जिन नये राज्यों में भाजपा जीती है उनमें झारखंड और हरियाणा ऐसे दो राज्य हैं, जहां का सीएम लग भग गुमनाम से व्यक्ति को बनाया गया. झारखंड में रघुवर दास और हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर इसकी दो मिसालें हैं. खट्टर तो खांटी आरएसएस बैकग्राउंड से हैं जिनकी कभी कोई राजनीतिक महत्वकांक्षा सामने नहीं आई थी. रघुवर दास भी कमोबेश उसी सांचे के नेता हैं.

इसलिए उत्तर प्रदेश में भी मोदी अमित शाह की टीम इसी परम्परा को दोहराना अपने भविष्य के लिए सुरक्षित मानेगी. क्योंकि उत्त प्रदेश का सीएम अगर कोई महत्वकांक्षी और बड़े कद का जाना पहचाना नाम हुआ तो वह खुद मोदी के लिए बड़ा चैलेंज बन सकता है.

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