एक बिन व्याही मां की दर्दनाक दास्तान जो 9 वर्षों से बेटी को पिता का नाम दिलाने की लड़ाई लड़ रही है

यह दर्दनाक कहानी  बेगूसराय में एक  ऐसी कुंआरी मां  की है जो अपनी बेटी के पिता का नाम पाने के लिए 9 वर्षों से दर- दर की ठोकर खा रही है लेकिन अपराधी के रसूख और लम्बी न्यायप्रक्रिया ने उसे तोड़ डाला है।

पीडित मां व बेटी

पीडित मां व बेटी

 

बेगूसराय से महफूज रसीद

अपनी बेटी को पिता का नाम दिलाने के लिए न्यायलय की चौकठ पर नाक रगडती इस पीड़ित महिला का एक शिक्षक ने शारीरिक शोषण किया था ।

 

डीएनए टेस्ट भी हुआ

बेगूसराय के बीरपुर थाना क्षेत्र के भवानंदपुर गॉव मे 2007 मे धटी इस धटना के बाद पीडिता राबिया खातून(बदला हुआ नाम) का लंबे समय बाद डीएनए टेस्ट कराया गया है । देश मे बलात्कार की धटना सभ्य समाज के लिए अभिशाप है । एैसी धटना पर पूरा देश जल्द से जल्द न्याय पाने के लिए सडको पर उतर आता है । पर आज से नौ साल पहले बलात्कार की एक एैसी ही घटना मे पीडिता को अबतक न्याय नही मिल पाया है ।

 

बेगूसराय के  गंव मे राबिया खातून का एक शिक्षक मो0 कैसर ने उस वक्त बलात्कार किया था जब वो बीड़ी बनाने के धागे को लेकर उसके पिता के पास गई थी । इस धटना के बाद आरोपी ने शादी का झासा देकर मामले को दबाने की कोशिश की पर यह मामला तब सुर्खियों में आ गया जब राबिया खातून गर्भवती हो गई और आरोपी ने किसी भी कीमत पर शादी से इनकार कर दिया ।

जेल में 

राबिया खातून बताती हैं कि ने बताया की इस घटना मे बाद गंव में पंचायत ने आरोपी पर शादी का दबाब दिया तो लडके ने किसी की एक नही सुनी । आरोपी और उसके परिवार का गंव मे रसूख है इस लिए मामला पंचायत से नही निपटा । बाद मे इस मामले को वीरपुर थाना मे दर्ज कराया गया। जिसके बाद आरोपी शिक्षक को जेल भी जाना पडा । बाद में हाईकोर्ट से लडका को जमानत मिल गई जबकि लडकी न्याय के लिए अदालतो के चक्कर लगाती फिर रही है ।अब पीडित की बच्ची भी अपने पिता से न्याय पाने के लिए अपनी मां के साथ , दर दर की ठोकर खाती फिर रही है । उसे अपने पिता का नाम भी मिल पा रहा है.

बेटी भी संघर्ष में शामिल

 

पीडित बच्ची ने बताया जो गरीबी और उस पर न्याय पाने के लिए दर दर की ठोकर खाती फिर रही बेटी और उसकी मॉ को न्याय पाने की जिद है । उसकी इस लडाई मे उसका साथ परिवार के लोग दे रहे हैं। जबकि आरोपी शिक्षक छुटटा धूम रहा है । इस मामले मे 2015 मे डीएनटेस्ट कराया गया था । पर न्याय पाने की लंबी प्रकिया के कारण उसे अभी तक इसका लाभ नहीं मिल पाया.

 

 

 

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